ठाकुरनगर/कोलकाता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस से संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक पर समर्थन मांगा. तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी ने इससे साफ मना करते हुए मोदी से इस विधेयक को वापस लेने के लिए कहा. पश्चिम बंगाल में दलित मतुआ समुदाय के आवास ठाकुरनगर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत ही एक एकमात्र स्थान है जो सांप्रदायिक हिंसा से खुद को बचाने के लिए पड़ोसी देशों से यहां आए हजारों हिंदू, सिख और अन्य समुदायों के शरणार्थियों को शरण दे सकता है.

उन्होंने कहा, “आजादी के समय देश के बंटवारे के बाद हिंदुओं, सिखों, ईसाइयों और पारसियों को सांप्रदायिक हिंसा के कारण भारत में शरण लेनी पड़ी.” उत्तरी 24 परगना जिले में लोगों से भरे मैदान को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, “इन शरणार्थियों को नागरिकता का अधिकार मिलना चाहिए. भारत ही उन्हें शरण दे सकता है.” उन्होंने कहा, “इसी लिए हमारी सरकार नागरिकता संशोधन विधेयक लाई. मैं तृणमूल कांग्रेस के नेताओं से इस विधेयक का समर्थन करने और शरणार्थी भाइयों एवं बहनों को उनके अधिकार दिलाने में सहायता करने का आग्रह करता हूं.”

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लोकसभा में पारित हो चुका विधेयक अब राज्यसभा में लंबित है. इसके कुछ ही देर बाद एक टीवी चैनल पर बोलते हुए ममता बनर्जी ने उनका आग्रह यह कहते हुए ठुकरा दिया कि उनकी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को लोगों को बांटने नहीं देगी और बंगालियों और गैर-बंगालियों, या हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाइयों में हिंसा नहीं फैलाने देगी.

उन्होंने कहा, “हम इसका विरोध करते हैं. सरकार को इसे वापस लेना होगा, क्योंकि हम सब भारतीय नागरिक हैं.” पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा, “नागरिकता संशोधन विधेयक के लिए वे हमारा समर्थन मांग रहे हैं. मैं उनका समर्थन क्यों करूं? राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के नाम पर उन्होंने असम से हमारे 45 लाख बंगालियों को बांट दिया जिनमें 23 लाख मुस्लिम हैं और बचे 22 लाख हिंदू हैं.” ममता ने कहा, “नागरिकता विधेयक के कारण समूचा पूर्वोत्तर जल रहा है. हम उन्हें पूर्वोत्तर को बरबाद नहीं करने देंगे.”