
Gargi Santosh
गार्गी संतोष, जी मीडिया के India.com में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह हाइपरलोकल, नेशनल और वर्ल्ड सेक्शन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. गार्गी को लाइफस्टाइल, हेल्थ, टेक्नोलॉजी, और ... और पढ़ें
प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायली बंधकों की रिहाई का खुले दिल से स्वागत किया है. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस दिशा में की गई कोशिशों को ईमानदार और सराहनीय बताया और पूरी तरह समर्थन देने की बात कही. पीएम मोदी ने कहा कि यह बंधकों की रिहाई न केवल उनके परिवारों की बहादुरी का प्रतीक है, बल्कि ट्रंप के अथक शांति प्रयासों और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दृढ़ संकल्प का भी प्रतीक है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह रिहाई दो साल से अधिक समय तक बंधक बनाए गए सभी लोगों की आज़ादी की पुष्टि है.
We welcome the release of all hostages after over two years of captivity. Their freedom stands as a tribute to the courage of their families, the unwavering peace efforts of President Trump and the strong resolve of Prime Minister Netanyahu. We support President Trump’s sincere…
— Narendra Modi (@narendramodi) October 13, 2025
बता दें गाजा में चल रही संघर्ष की स्थिति के बीच हमास और इजरायल के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी है. इस समझौते के तहत, हमास ने सोमवार को सभी 20 जीवित बंधकों को रिहा किया, जबकि इजरायल ने 1900 से अधिक फलस्तीनी कैदियों को रिहा किया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में यह समझौता मिडिल ईस्ट के लिए एक नई सुबह का संदेश लेकर आया है. ट्रंप अब इस जश्न में शामिल होने के लिए इजरायल भी पहुंचे हैं. इस कदम को क्षेत्र में शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.
भारत ने इस शांति समझौते का स्वागत किया है और क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए मिस्र में बुलाए गए शांति शिखर सम्मेलन में भाग लेने की सहमति जताई है. भारत की ओर से विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह प्रधानमंत्री मोदी का प्रतिनिधित्व करेंगे. इस सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अलावा लगभग 20 अन्य वैश्विक नेता शामिल होंगे. भारत का मानना है कि यह शिखर सम्मेलन क्षेत्र में स्थायी शांति और संघर्ष विराम की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
शर्म अल-शेख शांति शिखर सम्मेलन में गाजा और पश्चिम एशिया में स्थायी शांति लाने के उपायों पर चर्चा होगी. इस सम्मेलन की सह-अध्यक्षता मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप करेंगे. ब्रिटेन, इटली, फ्रांस और संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक प्रतिनिधि भी इसमें शामिल होंगे. इसका उद्देश्य न केवल गाजा में युद्ध समाप्त करना है, बल्कि पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता स्थापित करने के प्रयासों को बढ़ावा देना भी है. यह शिखर सम्मेलन क्षेत्र में स्थायी समाधान खोजने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
(इनपुट-एजेंसी के साथ)
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