सुप्रीम कोर्ट परिसर में हमले की घटना पर PM मोदी नाराज, CJI गवई से की बातचीत, जानें प्रधानमंत्री ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट में एक वकील द्वारा मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर जूता फेंकने की घटना पर अब प्रधानमंत्री मोदी का रिएक्शन सामने आया है. आइए खबर के माध्यम से जानते हैं उन्होंने क्या कहा और ये पूरा मामला आखिर क्या है?

Published date india.com Published: October 6, 2025 9:29 PM IST
सुप्रीम कोर्ट परिसर में हमले की घटना पर PM मोदी नाराज, CJI गवई से की बातचीत, जानें प्रधानमंत्री ने क्या कहा?

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक ऐसी घटना हुई, जिसने पूरे देश को चौंका दिया. दरअसल, अदालत की कार्यवाही के दौरान एक वकील ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी. आर. गवई की ओर जूता फेंकने की कोशिश की. हालांकि, यह प्रयास असफल रहा और सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति पर तुरंत काबू पा लिया.

बताया जा रहा है कि यह विवाद उस समय शुरू हुआ, जब कुछ लोगों ने सीजेआई गवई की भगवान विष्णु से जुड़ी एक टिप्पणी को लेकर आपत्ति जताई थी. इसके बावजूद, मुख्य न्यायाधीश ने इस घटना को बहुत शांत मन से लिया और अदालत में मौजूद वकीलों से कहा — इन बातों से विचलित मत होइए, मैं बिल्कुल विचलित नहीं हूं.

PM मोदी ने CJI से फोन पर की बात

अब इस घटना पर प्रधानमंत्री मोदी ने चिंता जताई है. उन्होंने सीजेआई बी. आर. गवई से फोन पर बात की. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा – भारत के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति बी. आर. गवई से बात की. सुप्रीम कोर्ट परिसर में उन पर हुआ हमला हर नागरिक के लिए दुखद है. हमारे समाज में इस तरह की नफरत और हिंसा की कोई जगह नहीं है.

उन्होंने आगे कहा कि न्यायमूर्ति गवई ने जिस धैर्य और संयम का परिचय दिया है, वह संविधान की गरिमा और न्याय के सिद्धांतों के प्रति उनकी दृढ़ निष्ठा को दर्शाता है. पीएम ने उनके शांत स्वभाव की सराहना करते हुए कहा कि यह देश के न्यायिक तंत्र में आस्था को और मजबूत बनाता है.

विपक्ष ने भी की कड़ी प्रतिक्रिया…

विपक्ष ने भी इस घटना की तीखी निंदा की. कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा – मुख्य न्यायाधीश पर हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि हमारे संविधान पर हमला है. उन्होंने कहा न्यायमूर्ति गवई एक सरल, ईमानदार और दयालु व्यक्ति हैं. ऐसे समय में पूरे राष्ट्र को एकजुट होकर उनके साथ खड़ा होना चाहिए. विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतंत्र और न्यायिक स्वतंत्रता के खिलाफ शर्मनाक हरकत बताया और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की.

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