नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसेवक दिवस पर नौकरशाहों को ईमानदारी की सीख दी. उन्होंने कहा कि अधिकारियों को हर हाल में कानून का पालन करना चाहिए. इसमें उन्हें मेरा पूरा साथ मिलेगा. मैं ईमानदार अफसरों के साथ हूं. मोदी ने इस दौरान कश्मीर में पत्थरबाजी से लेकर सोशल मीडिया के प्रभाव तक हर मुद्दे पर बात की.

उन्होंने नौकरशाहों से कहा है कि वे आपस में समन्वय बढ़ाते हुए और एकसाथ मिलकर काम करें और बदलाव लाएं। लोकसेवा दिवस के अवसर पर नौकरशाहों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि अब समय आ गया है कि कुछ हटकर सोचा जाए और सरकार एक नियामक की जगह सक्षम बनाने वाली इकाई के तौर पर सामने आए।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक इच्छाशक्ति सुधार ला सकती है लेकिन अफसरशाही का काम और जनता की भागीदारी बदलाव ला सकती है। हमें इन सबको एकसाथ लाना होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधार के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी है। मुझमें इसकी कमी नहीं है बल्कि थोड़ी ज्यादा ही है।  मोदी ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों को इस बात का आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि क्या उनका अनुभव एक बोझ बनता जा रहा है?

उन्होंने कहा कि अफसरशाही में पदक्रम एक समस्या है, जो कि औपनिवेशिक शासकों से आई है और उसे मसूरी (जहां लोकसेवा अकादमी स्थित है) में छोड़कर नहीं आया जाता। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की भूमिका बहुत प्रबल है लेकिन पिछले 15 साल में चीजें बदल गई हैं। उन्होंने लोकसेवकों से जनता तक पहुंचकर उसके कल्याण के लिए सोशल मीडिया, ई-गवर्नेंस और मोबाइल गवर्नेंस का इस्तेमाल करने के लिए भी कहा।

मोदी ने आईएएस अफसरों को संबोधित करते हुए कहा कि मैं चाहता हूं कि अगले एक साल में काम की क्वालिटी में बदलाव होना चाहिए. सिर्फ सर्वश्रेष्ठ होने से काम नहीं चलता है. अगर आप पर सर्वश्रेष्ठ होने का ठप्पा आप पर लगा है तो उसे आदत बनाना जरूरी है.

मोदी ने कहा कि अफसरों को गृहणियों से काफी कुछ सीखने की जरूरत है. किस तरह गृहणियां तमाम परेशानियों के बावजूद सभी चीजों को संभालती हैं. अपने परिवार को एक नई ऊंचाई पर ले जाती है, वही जिम्मेदारी आपकी भी है. उन्होंने कहा कि वरीयता क्रम का बोझ अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा है, हमें अपने अनुभव को बोझ नहीं बनने देना चाहिए. पदानुक्रम अभी भी एक मुद्दा है, यह हमें ब्रिटिश शासन से विरासत में मिला है जिसे हमने अभी भी छोड़ा नहीं है.

मोदी ने अधिकारियों से कहा कि एक नियामक होने के नाते हमें सक्षम बनाने वाली इकाई बनने की जरूरत है. मोदी ने नौकरशाहों से कहा कि हमारा अनुभव एक बोझ नहीं बनना चाहिए. हमें गर्व होना चाहिए कि जहां मैंने काम किया कि उस काम को मेरे जूनियर ने आगे बढ़ाया. हम सभी एक साथ मिलकर काम करना होगा.

कश्मीर में सेना पर पत्थरबाजी पर मोदी ने कहा कि हमारे फौजी कश्मीर में बाढ़ आने पर लोगों की जान बचाते हैं, लोग उनके लिए तालियां बजाते हैं. लेकिन बाद में यही फौजी पत्थर भी खाते हैं. सभी को आत्मचिंतन करना चाहिए.