नई दिल्‍ली: असम में शांति के लिए सोमवार को भारत सरकार ने असम के खूंखार उग्रवादी समूहों में से एक नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें उसे राजनीतिक और आर्थिक फायदे दिए गए हैं, लेकिन अलग राज्य या केंद्रशासित क्षेत्र की मांग पूरी नहीं की गई है. इस समझौते के तहत समझौते के मुताबिक 30 जनवारी को एनडीएफबी के 1550 उग्रवादी हथियार छोड़ देंगे. पीएम नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को लेकर तीन  ट्वीट करते हुए कहा है कि बोडो समझौते के बाद अब शांति, सद्भाव और एकजुटता का नया सवेरा आएगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा, बोडो समझौते के बाद अब शांति, सद्भाव और एकजुटता का नया सवेरा आएगा.

समझौते से बोडो लोगों के लिए परिवर्तनकारी परिणाम सामने आएंगे, यह प्रमुख संबंधित पक्षों को एक प्रारूप के अंतर्गत साथ लेकर आया.

प्रधानमंत्री मोदी ट्वीट में लिखा, यह समझौता बोडो लोगों की अनोखी संस्कृति की रक्षा करेगा और उसे लोकप्रिय बनाएगा और उन्हें विकासोन्मुखी पहलों तक पहुंच मिलेगी. यह समझौता बोडो लोगों की अनोखी संस्कृति की रक्षा करेगा और उसे लोकप्रिय बनाएगा तथा उन्हें विकासोन्मुखी पहलों तक पहुंच मिलेगी.

पीएम मोदी ने लिखा, बोडो लोगों को अपनी आकांक्षाओं को साकार करने में मदद पहुंचाने के वास्ते हम यथासंभव सबकुछ करने के लिए कटिबद्ध हैं: पहले जो लोग सशस्त्र प्रतिरोध से जुड़े थे, वे अब मुख्यधारा में कदम रखेंगे और राष्ट्र की प्रगति में योगदान करेंगे.

सरकार ने एनडीएफबी, एबीएसयू के साथ समझौता
सरकार ने सोमवार को असम के खूंखार उग्रवादी समूहों में से एक नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें उसे राजनीतिक और आर्थिक फायदे दिए गए हैं, लेकिन अलग राज्य या केंद्रशासित क्षेत्र की मांग पूरी नहीं की गई है. समझौते पर हस्ताक्षर करने वालों में ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (एबीएसयू) और यूनाइटेड बोडो पीपुल्स ऑर्गेनाइजेशन भी शामिल हैं. एबीएसयू 1972 से ही अलग बोडोलैंड राज्य की मांग के लिए आंदोलन चला रहा है.

27 वर्षों में तीसरा बोडो समझौता
यह पिछले 27 वर्षों में तीसरा बोडो समझौता है. अलग बोडोलैंड राज्य के लिए चले हिंसक आंदोलन में सैकड़ों लोगों की जान चली गई और सार्वजनिक एवं निजी संपत्तियों को नुकसान हुआ.

ये रहे मौजूद
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में त्रिपक्षीय समझौते पर असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल, एनडीएफबी, एबीएसयू के चार धड़ों के शीर्ष नेता, गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव सत्येन्द्र गर्ग और असम के मुख्य सचिव कुमार संजय कृष्णा ने हस्ताक्षर किए.

यह ऐतिहासिक समझौता, पुरानी समस्या का स्थायी समाधान होगा
गृह मंत्री ने समझौते को ऐतिहासिक करार दिया और कहा कि इससे बोडो लोगों की दशकों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान होगा. उन्होंने कहा, इस समझौते से बोडो क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास होगा और असम की क्षेत्रीय अखंडता से समझौता किए बगैर उनकी भाषा और संस्कृति का संरक्षण होगा. उन्होंने कहा, यह ऐतिहासिक समझौता है.

4000 से अधिक लोगों को जान गंवानी पड़ी
गृह मंत्री ने कहा कि बोडो उग्रवादियों की हिंसा में पिछले कुछ दशकों में चार हजार से अधिक लोगों को जान गंवानी पड़ी. शाह ने कहा कि असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी. असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि समझौते के बाद राज्य में विभिन्न समुदाय सौहार्द के साथ रह सकेंगे. केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि समझौते से बोडो मुद्दे का व्यापक समाधान होगा.

1550 उग्रवादी 30 जनवरी को हथियार छोड़ देंगे
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बताया कि समझौते के मुताबिक एनडीएफबी के 1550 उग्रवादी 30 जनवरी को हथियार छोड़ देंगे
– अगले तीन वर्षों में 1500 करोड़ रुपए का आर्थिक कार्यक्रम लागू किया जाएगा
– आर्थिक कार्यक्रम में जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों की 750- 750 करोड़ रुपए की बराबर भागीदारी होगी
– बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद् (बीटीसी) के वर्तमान ढांचे को और शक्तियां देकर मजबूत किया जाएगा
– इसकी सीटों की संख्या 40 से बढ़ाकर 60 की जाएगी
– बोडो बहुल गांवों को बीटीसी में शामिल करने और जहां बोडो की बहुलता नहीं है, उन्हें बीटीसी से बाहर निकालने के लिए आयोग का गठन होगा.  (इनपुट: एजेंसी)