
Satyam Kumar
सत्यम, बिहार से हैं. उन्होंने LS College, मुजफ्फरपुर, बिहार से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया से MA In Media Governance में मास्टर्स किया है. मास्टर्स के साथ ... और पढ़ें
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अगले सप्ताह तीन इस्लामिक देशों, जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान के दौरे पर जाने वाले है. इन तीनों देशों में एक देश ऐसा है जिसने 1971 की जंग में भारत का खुलकर समर्थन किया था. ओमान, इन तीनों देशो में से एक, यह भारत के पुराने मित्र देशों में शामिल है. कई कूटनीतिक मसलों पर इस देश ने अपनी दोस्ती साबित की है. यह पहला अरब देश था जिसने 197 के युद्ध में भारत का खुलकर समर्थन किया था. इस आर्टिकल में ओमान से भारत की दोस्ती के बारे में बात करेंगे..
ओमान अरब दुनिया का सबसे पुराना स्वतंत्र देश है, जिसकी रणनीतिक लोकेशन (Strategic Location) इसे बेहद खास बनाती है. यह अरब प्रायद्वीप के दक्षिण-पूर्व कोने पर खाड़ी के मुहाने पर स्थित है. ओमान उन गिने-चुने मुस्लिम-बहुल देशों और एकमात्र अरब देशों में से एक था जिसने 1971 के संघर्ष के दौरान भारत का खुलकर समर्थन किया था. तब से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग लगातार बढ़ा है. ओमान तीनों भारतीय सेवाओं (सेना, नौसेना, वायु सेना) के साथ संयुक्त अभ्यास (Joint Exercises) करने वाला पहला खाड़ी देश था.
ओमान के इतिहास की बात करें तो 17वीं शताब्दी के बाद से, ओमानी सल्तनत एक विशाल साम्राज्य था जिसने फारस की खाड़ी और हिंद महासागर में अपने प्रभाव के लिए पुर्तगाली और ब्रिटिश साम्राज्यों के साथ मुकाबला किया. 1970 में, सुल्तान कबूस ने अपने पिता को पद से हटाकर देश को खोल दिया और आधुनिकीकरण (Modernization) की नीति शुरू की. उन्होंने उस गुलामी प्रथा को समाप्त किया जो कभी यहां के व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा थी. जनवरी 2020 में सुल्तान कबूस की मृत्यु के बाद, उनके चचेरे भाई हैथम बिन तारिक अल सैद (Haitham bin Tariq Al Said) गद्दी पर बैठे. पीएम मोदी उन्हीं के निमंत्रण पर ओमान की यात्रा कर रहे हैं.
ओमान भारत की पश्चिम एशिया नीति (West Asia Policy) का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और यह अरब देश में भारत का सबसे पुराना क्षेत्रीय रणनीतिक भागीदार (Oldest Regional Strategic Partner) बना हुआ है. ओमान-भारत की दोस्ती सदियों के व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों पर बनी एक गहरी, रणनीतिक साझेदारी है. इसे 1955 में औपचारिक रूप दिया गया और 2008 में स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप (Strategic Partnership) के स्तर तक बढ़ाया गया. ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि पीएम मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार और निवेश के मजबूत रिश्तों को और नई ऊंचाइयों पर ले जाने का काम करेगी.
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