नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दो दिवसीय यात्रा पर चीन में हैं. पिछले कुछ सालों से दोनों देशों के रिश्तों में आई खटास को देखते हुए मोदी की इस यात्रा को लेकर देश और दुनिया में चर्चा हो रही है. चीन भी मोदी की इस खास यात्रा को फलदायी बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ा है. वहां उनके स्वागत की जोरदार तैयारी हुई है. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और मोदी के बीच दो दिनों तक सेंट्रल चीन में स्थित वुहान में चर्चा हो रही है. चीन में ऐसा पहली बार है जब उसके राष्ट्रपति किसी देश के शासनाध्यक्ष से बातचीत के लिए बीजिंग के बाहर किसी शहर में दो दिनों तक हैं. इससे पहले केवल बहुपक्षीय सम्मेलनों में भाग लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति बीजिंग से बाहर गए हैं. दुनिया के प्रतिष्ठित अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक चीन के राष्ट्रपति का मोदी के स्वागत और उनके साथ बातचीत के बीजिंग से बाहर निकलना अपने आप में इस यात्रा के महत्व को बताता है. द्विपक्षीय वार्ता के लिए चीन के राष्ट्रपति का बीजिंग से बाहर निकलना पहली बार है. मोदी भी स्वागत को लेकर अभिभूत हैं. Also Read - PM Narendra Modi Birthday: रिया को लेकर पीएम मोदी के मन की बात, देखें श्याम रंगीला का मजेदार Video

क्यों अहम हो गई है वार्ता

अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वार, उत्तर कोरिया को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक नीति और दक्षिण चीन सागर में तनाव ने भारत को लेकर चीन को अपने रुख में नरमी लाने पर मजबूर किया है. दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने भी अपनी चीन नीति में व्यापक बदलाव का संकेत दिया है. मार्च में तिब्बती अध्यात्मिक गुरु दलाई लामा की दिल्ली में रैली करने पर रोक लगाकर संकेत दिया कि वह चीन के साथ टकराव नहीं चाहता. चीन दलाई लामा को खतरनाक अलगाववादी मानता है. हालांकि अन्य क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच मतभेद बरकरार है.

मोदी ने भी जिनपिंग को दिया था विशेष सम्मान

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सितंबर 2014 भारत की यात्रा पर आए थे. उस वक्त पीएम मोदी ने अपने गृह नगर अहमदाबाद में जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन स्वागत किया था. जिनपिंग तीन दिनों तक भारत में रहे. वह अहमदाबाद के हयात होटल में ठहरे थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग साबरमती आश्रम भी गए थे, यहां जिनपिंग ने चरखा भी चलाया था. जिनपिंग की यात्रा के पहले दिन भारत और चीन ने तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे.

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किसी समझौते पर नहीं होगा हस्ताक्षर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग इस सप्ताह वुहान शिखर सम्मेलन में किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे और न ही कोई संयुक्त बयान जारी करेंगे, लेकिन वे पारस्परिक विश्वास कायम करने और लंबित मुद्दों के समाधान के लिए महत्वपूर्ण सहमति पर पहुंचने का प्रयास करेंगे. चीन के उप विदेश मंत्री कोंग जुआनयू ने दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के बारे में मीडिया से कहा था कि दोनों पक्ष किसी समझौते पर हस्ताक्षर न करने या कोई संयुक्त दस्तावेज जारी न करने, लेकिन लंबित मुद्दों के समाधान के लिए महत्वपूर्ण सहमति पर पहुंचने के लिए सहमत हुए हैं. उन्होंने नेताओं के इस तरह का शिखर सम्मेलन करने का कारण बताते हुए कहा कि यह अनौपचारिक शिखर सम्मेलन अपने आप में इस तरह का पहला सम्मेलन है और दोनों देशों में इस तरह का कोई पूर्व उदाहरण नहीं है.

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10 बार मिल चुके हैं पीएम मोदी और जिनपिंग

यह पूछे जाने पर कि क्या बातचीत में डोकलाम मुद्दा और सीमा विवाद का मुद्दा भी उठेगा, कोंग ने कहा कि डोकलाम प्रकरण विश्वास की कमी की वजह से हुआ था. उन्होंने कहा , ‘‘ दोनों देशों को सीमा मुद्दे के समाधान के लिए स्थितियां और विश्वास बनाने की जरूरत है.’’ कोंग ने कहा कि राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री मोदी दोनों का रणनीतिक विजन और ऐतिहासिक दायित्व है. उन्होंने कहा, ‘‘दोनों को उनके लोगों का व्यापक समर्थन है. दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों को बड़ा महत्व दिया है और इस संबंध को बढ़ाने के लिए काफी मेहनत की है.’’ कोंग ने कहा, ‘‘पिछले कुछ वर्षों में वे 10 बार मिले, एक-दूसरे की राजधानियों और गृह नगरों का दौरा किया. वे कई बहुपक्षीय अवसरों पर भी मिले.’’