नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे. 11 हजार करोड़ रुपए की लागत से बने ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे देश में अपनी तरह का पहल एक्सप्रेसवे है. यह देश का पहला ऐसा एक्सप्रेसवे है जो सोलव लाइट से जगमग होगा, इसके अलावा हर 500 मीटर की दूरी पर सड़क के दोनों तरफ बारिश के पानी को बचाने का उपाय भी इस एक्सप्रेसवे पर किया गया है. Also Read - पीएम मोदी ने बनारस के जिन गांवों को लिया गोद, वहां ले जाए जाएंगे विदेशी पर्यटक, ये है CM योगी का प्लान

135 किलोमीटर लंबे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे को बनाने के लिए 30 महीने का समय तय किया गया था लेकिन इसे रिकॉर्ड 17 महीने में ही पूरा किया गया है. नवंबर 2015 में पीएम मोदी ने इस एक्सप्रेसवे की नींव रखी थी. ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे कुंडली से शुरू होता है और पलवल पर खत्म होगा. बता दें कि कुंडली और पलवल दोनों हरियाणा में ही हैं, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे को बनाने का उद्देश्य यही है कि दूसरे राज्यों की गाड़ियों को दिल्ली में घुसने की जरूरत न पड़े और वो बाहर बाहर से ही निकल जाएं. Also Read - आज के युवा भगत सिंह कैसे बन सकते हैं? सवाल का पीएम मोदी ने दिया जवाब

भारत का पहला स्मार्ट और ग्रीन हाईवे
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे देश का पहला स्मार्ट और ग्रीन हाईवे है. 14 लेन के इस हाईवे पर सोलर लाइट का इंतजाम किया गया है, इसके अलावा रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के लिए एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ हर 500 मीटर पर इंतजाम किया गया है. हाईवे पर देशभर के 36 ऐतिहासिक इमारतों के डिजाइन को लगाया गया है, इसके अलावा हाईवे को मॉडर्न लुक देने के लिए 40 फाउंटेन भी लगाए गए हैं. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे को रिकॉर्ड 500 दिनों में पूरा किया गया है.

ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर 8 सोलर पावर प्लांट लगाए गए हैं जिनकी कुल क्षमता 4 हजार किलोवॉट यानी कि 4 मेगावॉट है. ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे को बनाने में पर्यावरण का भी ध्यान रखा गया है. हाईवे के दोनों तरफ ढ़ाई लाख पौधे लगाए गए हैं. गडकरी ने बताया कि साइड में पौधे लगाने के अलावा हाईवे के बीच में डिवाइडर पर भी पौधे लगाए गए हैं. इसके अलावा हाईवे के दोनों तरफ 2.5 मीटर का साइकिल ट्रैक भी बनाया गया है

इंटेलिजेंट हाईवे ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे को स्मार्ट हाईवे इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि ये स्मार्ट और इंटेलिजेंट हाईवे ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है. इसके अलावा हाईवे वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम से भी लैस है जो अपने आप में विश्वस्तर की तकनीक है. पर्यावरण के लिहाज से अच्छा और विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस होने की वजह से ही ये भारत का पहला स्मार्ट हाईवे बन गया है.

सिग्नल फ्री एक्सप्रेसवे
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे एक सिग्नल फ्री एक्सप्रेसवे है, इससे लोगों को गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और पलवल आने जाने के लिए सिग्नल पर रुकना नहीं पड़ेगा. एक अनुमान के मुताबिक उम्मीद है कि लगभग 2 लाख गाड़ियां जिनमें बड़े ट्रक और कमर्शियल गाड़ियां भी शामिल हैं, इस हाईवे से रोजाना गुजरेंगी और राजधानी में प्रवेश नहीं करेगी जिससे राजधानी में प्रदूषण में 47 फीसदी तक की कमी होने की उम्मीद है. ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जाने वाले लगभग 50 हजार वाहन डायवर्ट हो जाएंगे जिससे प्रदूषण में कमी आएगी.

ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर एक नजर
– इस हाईवे से उम्मीद जताई जा रही है कि राजधानी दिल्ली में 47 फीसदी प्रदूषण में कमी होगी.
– ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर लगे साइनेज से ट्रैफिक स्पीड की लाइव जानकारी मिलेगी.
– ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की एक खासियत ये भी है कि यहां टोल टैक्स दूरी के हिसाब से लिया जाएगा. आप जितनी दूरी की यात्रा करेंगे आपको उसी हिसाब से टोल देना पड़ेगा.
– ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे इतना शानदार है कि आप यहां 120 किलोमीटर प्रतिघंटे की स्पीड से अपनी गाड़ी दौड़ा सकेंगे लेकिन तय सीमा से अधिक स्पीड पर गाड़ी चलाने से ऑटोमैटिक तरीके से कैमरे के सहारे ही आपका चालान कट जाएगा.
– ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर ओवरलोड गाड़ियों को एंट्री नहीं मिलेगी.
– हाईवे पर सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे जिसके सहारे कहीं दुर्घटना होने पर सीधे कंट्रोल रूम तक जानकारी पहुंच जाएगी.