नई दिल्ली. पीएम नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट, मुंबई से अहमदाबाद तक के लिए चलने वाली बुलेट ट्रेन आम और चीकू के बागों में फंस गई है. जी हां, इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण में देरी हो रही है. क्योंकि महाराष्ट्र के आम और चीकू उत्पादक किसान बुलेट ट्रेन की पटरियां बिछाने के लिए अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हो रहे हैं. ऐसे में इस बात के अंदेशे बढ़ गए हैं कि इस 1 लाख करोड़ की परियोजना के लिए दिसंबर तक जमीन अधिग्रहण का काम पूरा हो जाए. अगर दिसंबर तक बुलेट ट्रेन के लिए जमीन तयशुदा समय पर नहीं मिल पाती है तो इस प्रोजेक्ट में देरी होगी. प्रोजेक्ट में हो रही देरी को देखते हुए अब सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने इस परियोजना की निगरानी शुरू कर दी है. जापान सरकार के बढ़ते दबाव के बीच PMO हर हफ्ते इस प्रोजेक्ट की निगरानी कर रहा है. साथ ही आम और चीकू उत्पादक किसानों को जमीन अधिग्रहण के लिए राजी करने की कवायद भी तेज कर दी गई है.

108 किलोमीटर की जमीन पर रार
दरअसल, बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए महाराष्ट्र के पालघर में जमीन अधिग्रहण को लेकर विवाद हो रहा है. इस इलाके में बुलेट ट्रेन की पटरियां बिछाने के लिए कुल 108 किलोमीटर की जमीन चाहिए, जिसमें आम और चीकू के बाग हैं. इन्हीं बागों के मालिक किसानों ने परियोजना के लिए जमीन देने से इनकार कर दिया है. पालघर के चीकू उत्पादक किसान 62 वर्षीय दशरथ पुरव ने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘मैंने इन बागों को दशकों तक मेहनत कर सींचा है. अब सरकार कह रही है कि यह जमीन हम उन्हें दे दें.’ दशरथ पुरव जमीन के एवज में सरकार से अपने बच्चों के लिए नौकरी की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘मैंने अपने बच्चों के भविष्य के लिए ये बाग तैयार किए हैं, सरकार को जमीन देने के लिए नहीं. मैं अपनी जमीन तभी बेचूंगा जब सरकार इसके बदले मेरे दोनों बेरोजगार बच्चों में से किसी एक को सरकारी नौकरी देने का वादा करे.’

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जमीन न मिली तो प्रोजेक्ट में होगी देरी
जापान की एजेंसी, जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (जिका) अगले महीने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की समीक्षा करने वाली है. अगर इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण में देरी होती है तो इसका प्रभाव परियोजना की समय-सीमा पर पड़ेगा. जिका की प्रवक्ता ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि भारत सरकार को जल्द से जल्द जमीन अधिग्रहण और इसके कारण होने वाली पुनर्वास संबंधी समस्याओं को दूर करना होगा. इसके बाद ही जिका इस प्रोजेक्ट के मुख्य हिस्से के लिए लोन देने पर राजी होगा. जिका की प्रवक्ता ने भी जमीन अधिग्रहण में हो रही देरी पर चिंता जताते हुए कहा, ‘हो सकता है कि प्रोजेक्ट के लिए होने वाले समझौते में देरी हो, क्योंकि भारत सरकार सभी पर्यावरण और सामाजिक समस्याओं को दूर करने के बाद ही इस प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ेगी.’ वहीं, मामले को लेकर बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए बनी एजेंसी, नेशनल हाईस्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रवक्ता धनंजय कुमार ने भी कहा कि भारत में जमीन अधिग्रहण हमेशा से कठिन काम रहा है. हमें मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर भी स्थानीय लोगों का प्रतिरोध झेलना पड़ रहा है.

Bullet train india inside design and facts| अंदर से ऐसी दिख सकती है भारतीय बुलेट ट्रेन की डिजाइन

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2022 से पहले काम खत्म करने पर जोर
भारत सरकार अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना को देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ, यानी 2022 से पहले पूरा करना चाहती है. ऐसे में जमीन अधिग्रहण की समस्या कहीं विस्तार रूप न ले ले, इसके लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं. इसके मद्देनजर इसी महीने भारत सरकार के अधिकारी जापान के ट्रांसपोर्ट मंत्रालय के अधिकारियों से टोकियो में मिलने वाले हैं. इस बैठक में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में आ रही समस्याओं को दूर करने पर विचार-विमर्श किया जाएगा. जापानी ट्रांसपोर्ट मंत्रालय के एक अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि भारतीय अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि वे जल्द ही जमीन अधिग्रहण की समस्या को दूर कर लेंगे. इस अधिकारी ने कहा, ‘हम भारत सरकार के साथ मिलकर इस परियोजना पर काम कर रहे हैं. हमारा लक्ष्य है कि सारी समस्याओं को दूर कर वर्ष 2023 तक बुलेट ट्रेन का संचालन शुरू कर दिया जाए.’

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रेल मंत्री बोले- समस्या का ढूंढ रहे समाधान
बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर जमीन अधिग्रहण में आ रहे रोड़े के मद्देनजर रेल मंत्रालय भी गंभीर है. रेल मंत्री पीयूष गोयल ने मीडिया के साथ बातचीत में आज यह भरोसा दिलाया कि इस प्रोजेक्ट में कोई समस्या नहीं है, सभी काम पटरी पर है. रेल मंत्री ने प्रोजेक्ट को लेकर आ रही समस्याओं को लेकर कहा कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पटरी पर है. उन्होंने कहा, ‘इस देश में किसी भी विकास परियोजना या नए विचारों के साथ कोई न कोई मुद्दे जुड़े होते हैं. लेकिन हमें उनके समाधान निकालकर आगे बढ़ना होगा.’