प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन में भारत को बड़ी कामयाबी दिलाई. चीन के लाख एतराज के बावजूद मोदी ब्रिक्स घोषणापत्र में आतंकवाद का मुद्दा शामिल कराने में सफल रहे. डोकलाम पर चीन के साथ तीखे मतभेद के बावजूद मोदी ने चीन में आयोजित हुए ब्रिक्स में अपनी बात मनवा ही ली. मोदी ने अपनी रणनीति से कुछ ऐसा कर दिखाया कि चीन-पाकिस्तान दोनों के लिए असहज स्थिति हो गई है. आतंकवाद के मुद्दे चीन पाकिस्तान का बचाव करता आया है.

खास बात तो ये है कि सम्मेलन शुरू होने से पहले ही चीन ने साफ कह दिया था कि वह ब्रिक्स में आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान का नाम नहीं उछलने देना चाहता है. बकायदा चीन ने आतंकवाद से लड़ने को लेकर पाकिस्तान की तारीफ भी की. लेकिन घोषणापत्र में जिस तरह जैश ए मोहम्मद, लश्कर ए तैयबा, हिज्बुल मुजाहिदीन का जिक्र किया गया है वो सीधे तौर पर पाकिस्तान पर ही निशाना है.

तीनों आतंकी संगठन पाकिस्तान से ऑपरेट होते हैं और इनके सरगना खुलकर भारत को धमकी देते हैं. जैश सरगना मसूद अजहर पर पिछले महीने ही अमेरिका ने पाबंदी लगाई है. हालांकि यूएम ने मसूद पर पाबंदी का भारत का प्रस्ताव दो बार पास नहीं हो पाया. दोनों ही मौकों पर चीन ने अपर्याप्त सबूत होने की बात कहकर मसूद को बचा लिया. लेकिन चीन में हो रहे ब्रिक्स में ही वह पाक स्थित आतंकी संगठनों का बचाव नहीं कर सका.

पाकिस्तान के साथ ही चीन के लिए भी ये एक बड़ा झटका है. एक चीनी विशेषज्ञ ने यहां तक आशंका जाहिर की है कि इससे चीन-पाक संबंधों में खटास आ सकती है. ‘चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ कंटेपररी इंटरनेशनल रिलेशंस’ के निदेशक हू शिशेंग ने कहा कि चीनी राजनयिकों को आने वाले महीनों में पाकिस्तान के समक्ष बहुत सारे स्पष्टीकरण देने होंगे. उन्होंने कहा कि इस घोषणापत्र में हक्कानी नेटवर्क का नाम शामिल करना ‘मेरी समझ से परे’ है.

क्या था घोषणापत्र में?

ब्रिक्स देशों ने आज तालिबान, अल-कायदा और पाकिस्तान आधारित लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मुहम्मद जैसे आतंकी संगठनों द्वारा की जाने वाली हिंसा पर गंभीर चिंता जाहिर की. इसके साथ ही इन देशों ने आतंकवाद से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक समझौते को जल्द से जल्द स्वीकार करने की मांग की.

चीन के श्यामेन में हो रहे ब्रिक्स घोषणापत्र में कहा गया कि ब्रिक्स देशों समेत पूरी दुनिया आतंकी हमलों की निंदा करती है. हम सभी तरह के आतंकवाद की निंदा करते हैं चाहे उसे किसी ने भी अंजाम दिया हो और वो कहीं भी हुए हो. हम क्षेत्र में तालिबान, आईएसआईएस, अलकायदा, लश्कर ए तैयबा, जैश ए मोहम्मद, तहरीक ए तालिबान की ओर से फैलाई जा रही हिंसा की निंदा करते हैं.

ब्रिक्स ने इस्टर्न तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट और इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उज्बेकिस्तान, तहरीक-ए-तालिबान और हिज्ब उत-तहरीर जैसे आतंकी संगठनों का भी जिक्र किया. ब्रिक्स ने कहा कि हम संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से ‘कंप्रीहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेरेरिज्म’ (अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र समझौते) को जल्दी ही अंतिम रूप दिए जाने और इसे अंगीकार किए जाने की मांग करते हैं.

क्या कहा था चीन ने?

सम्मेलन से पहले ही चीन ने अपनी मंशा साफ करते हुए पाकिस्तान का बचाव किया और उसके आतंकवाद से लड़ने के प्रयासों की प्रशंसा की. चीन ने यह भी साफ़ किया था कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान  पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर भारत की चिंताओं पर चर्चा नहीं होगी.

चीन की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा था कि पाकिस्तान आतंकवाद के विरुद्ध प्रयासों में सबसे आगे है और उसने इसके लिए बलिदान दिया है. हुआ ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान द्वारा किए गए योगदान व बलिदान को मान्यता देनी चाहिए. हमने पाया है कि जब पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी होने की बात आती है तो भारत की कुछ चिंताएं हैं. मैं नहीं सोचती कि यह ऐसा मुद्दा है जिस पर ब्रिक्स में चर्चा की जानी चाहिए.