National Education Policy: नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लेकर आज सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी हिस्सा लिया. करीब तीन दशक के बाद आई नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर राज्यपालों का सम्मेलन कोरोना वायरस महामारी के चलते वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो रहा है. पीएम मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस सम्मेलन को संबोधित किया. इस दौरान पीएम मोदी ने देश की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर जनता के सामने अपनी बात रखी. Also Read - कोसी-मिथिलांचल के दिलों को जोड़ेगा महासेतु, 86 साल का लंबा इंतजार आज हुआ खत्म

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा – ‘देश की आकांक्षा को पूरा करने का महत्वपूर्ण माध्यम शिक्षा नीति और शिक्षा व्यवस्था होती है. शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी से केंद्र, राज्य सरकार, स्थानीय निकाय, सभी जुड़े होते हैं. लेकिन ये भी सही है कि शिक्षा नीति में सरकार, उसका दखल, उसका प्रभाव, कम से कम होना चाहिए.शिक्षा नीति से जितना शिक्षक, अभिभावक जुड़े होंगे, छात्र जुड़े होंगे, उतना ही उसकी प्रासंगिकता और व्यापकता, दोनों ही बढ़ती है. देश के लाखों लोगों ने, शहर में रहने वाले, गांव में रहने वाले, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने, इसके लिए अपना फीडबैक दिया था, अपने सुझाव दिए थे.’ Also Read - किसान बिल: पीएम मोदी का विपक्ष पर कटाक्ष-किसान सब देख रहा है, कौन हैं ये बिचौलिए...

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने आगे कहा- ‘गांव में कोई शिक्षक हो या फिर बड़े-बड़े शिक्षाविद, सबको राष्ट्रीय शिक्षा नीति, अपनी शिक्षा शिक्षा नीति लग रही है. सभी के मन में एक भावना है कि पहले की शिक्षा नीति में यही सुधार मैं होते हुए देखना चाहता था. राष्ट्रीय शिक्षा नीति की स्वीकारता की बड़ी वजह यही है.

पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति सिर्फ पढ़ाई के तौर तरीकों में बदलाव के लिए ही नहीं है. ये 21वीं सदी के भारत के सामाजिक और आर्थिक पक्ष को नई दिशा देने वाली है. ये आत्मनिर्भर भारत के संकल्प और सामर्थ्य को आकार देने वाली है. आज दुनिया भविष्य में तेजी से बदलते नौकरी और काम को लेकर चर्चा कर रही है. नई शिक्षा नीति देश के युवाओं को भविष्य की आवश्यकताओं के मुताबिक शिक्षा और स्किल्स दोनों मोर्चों पर तैयार करेगी.’