
Anil
हिंदी जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया. नवोदय टाइम्स, नवभारत टाइम्स (Sunday Times) और Zee न्यूज के कई डिजिटल प्लेटफार्म इंटर्न के ... और पढ़ें
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक तरफ जहां विपक्ष के निशाने पर वहीं, अब उनके मणिपुर दौरे की खबर सामने आने के बाद से एक बार फिर से राजनीति गरमा गई है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक मणिपुर में हुई हिंसा के बाद पहली बार पीएम मोदी शनिवार को राज्य का दौरा करेंगे. मई 2023 से ही राज्य जातीय हिंसा में झुलस रहा है, जिसकी वजह से प्रदेश में राष्ट्रपति शासन तक लागू करना पड़ा. अब पीएम मोदी के दौरे को लेकर राज्य में सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था का इतंजाम किया गया है. उम्मीद जताई जा रही है कि पीएम मोदी मणिपुर की जनता को भी संबोधित कर सकते हैं.
राज्य के मुख्य सचिव ने पीएम मोदी के इस दौरे की पुष्टि की है. बता दें कि इस दौरे की अटकलें कई दिनों से लगाई जा रही थीं, लेकिन कोई भी आधिकारिक तौर ऐलान नहीं हुआ था. राज्य के मु्ख्य सचिव पुनीत कुमार गोयल ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी दोपहर के 12:30 बजे मिजोरम के आइजोल से चुराचांदपुर जिले में पहुंचेंगे. यहां वह मीतेई और कुकी समुदायों के बीच संघर्ष की वजह से बेघर हुए लोगों से मुलाकात करेंगे. इसके अलावा, प्रधानमंत्री राज्य भर में शुरू की जाने वाली लगभग 7,300 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की नींव रखेंगे और पीस ग्राउंड में एक आम जनता को संबोधित करेंगे.
चुराचांदपुर का चुना जाना इसलिए अहम है क्योंकि यह जिला हिंसा से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में से एक था और यहां कुकी बहुल है. जिसमें कम से कम 260 लोगों की जान चली गई और हजारों लोग बेघर हो गए हैं. प्रधानमंत्री तकरीबन 2:30 बजे राज्य की राजधानी इम्फाल जाएंगे और जहां वह 1,200 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और एक बड़ी सभा को भी संबोधित करेंगे.
मणिपुर के मुख्य सचिव पुनीत कुमार गोयल ने कहा कि, ‘प्रधानमंत्री की यह यात्रा राज्य में शांति, आम जन-जीवन और तेजी से विकास का रास्ता खोलेगी. राज्य सरकार और भारत सरकार की ओर से मैं मणिपुर के लोगों से अनुरोध करता हूं कि वे राज्य में प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए आगे आएं और बड़ी संख्या में कार्यक्रमों का हिस्सा बनें’.
मणिपुर में हिंसा 3 मई, 2023 को शुरू हुई थी, जब मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ का आयोजन किया गया था और विपक्ष तब से प्रधानमंत्री पर राज्य का दौरा नहीं करने के लिए हमला कर रहे है.
विपक्ष ने अगस्त 2023 में भी संसद में अविश्वास प्रस्ताव बिल पेश किया था और मणिपुर मुद्दे पर केंद्र को घेरने की कोशिश की थी, लेकिन सरकार ने पलटवार किया था और पूर्वोत्तर में कांग्रेस की सत्ता में रहने के दौरान की गई नाकामियों को लोगों को दिखाया था. प्रधानमंत्री मोदी ने भी मणिपुर के लोगों को आश्वासन दिया था कि देश उनके साथ है और जल्द ही शांति का रास्ता निकाला जाएगा.
जब इस यात्रा की अटकलें लगाई जा रही थीं, तब कुछ कांग्रेस नेताओं ने कहा था कि चूंकि यह हिंसा शुरू होने के दो साल से भी ज्यादा का समय बीत चुका है. इसलिए यह बहुत कम और बहुत देर से उठाया गया कदम है. शुक्रवार को मणिपुर कांग्रेस अध्यक्ष कैशम मेघचंद्र ने कहा कि यह यात्रा केवल प्रतीकात्मक है.
समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक उन्होंने कहा, मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा को केवल प्रतीकात्मक मानता हूं. राहत शिविरों में रह रहे बेघर लोगों सहित कई महीनों से पीड़ित लोगों को शांति, पुनर्वास और न्याय के लिए एक ठोस रोडमैप की उम्मीद थी… बेहतर होता अगर उन्होंने यह बता दिया होता कि यह यात्रा शांति और न्याय लाने से जुड़ी हुई है. सभी पक्षों से बातचीत न होना बहुत निराश करने वाला है.
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