ठाकुरनगर (पश्चिम बंगाल): पश्चिम बंगाल में रैलियां करने पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी दलित समुदाय ‘ऑल इंडिया मतुआ महासंघ’ की कुलदेवी बोरोमा (बीनापाणि देवी) से भी मिलने पहुंचे. उन्होंने बोरोमा से पांच मिनट तक मुलाकात की. यही नहीं पीएम ने बोरोमा के पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया. इससे पहले पीएम ने मतुआ मुख्यालय स्थित नट मंदिर में पूजा की. बोरोमा की उम्र 100 साल से अधिक बताई जाती है. Also Read - World Wildlife Day: PM Modi ने पर्यावरण के लिए काम करने वालों की सराहना की, कही ये बात

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बता दें कि बोरोमा को राज्य में एक बड़े तबके में बेहद प्रभावशाली माना जाता है. जहां ठाकुरनगर में वह रहती हैं, वो कस्बा बांग्लादेश की सीमा के निकट है. ठाकुरनगर में मतुआ समुदाय की अच्छी खासी आबादी है. मूल रूप से यह समुदाय पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से यहां आया था. धार्मिक अत्याचार की वजह से 1950 के दशक में इन लोगों ने यहां पर पनाह ली थी. मतुआ संप्रदाय की महारानी वीणापाणि देवी के घर के नजदीक ही पीएम मोदी की रैली का आयोजन किया गया.

मोदी ने समुदाय द्वारा आयोजित जनसभा को संबोधित किया. महासंघ के महासभापतियों में से एक मंजुल कृष्णा ठाकुर के बेटे शांतनु ठाकुर और अन्य नेताओं ने मतुआ परंपरा के अनुसार प्रधानमंत्री को शॉल, माला और स्मृति चिह्न देकर उनका स्वागत किया. समुदाय को संबोधित करते हुए मोदी ने ठाकुरनगर की मिट्टी को पवित्र बताया. इसके बाद उन्होंने मतुआ समुदाय के दिवंगत नेता ठाकुर गुरुचंद और हरिचंद का भी उल्लेख किया. प्रधानमंत्री ने कहा, “मुझे ‘बोरोमा ‘ और हरिचंद ठाकुर के वंशजों के साथ होने पर गर्व है.”

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बता दें कि प्रभाव को देखते हुए अक्सर नेता बोरोमा से मिलने पहुंचते हैं. कुछ माह पहले पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी बोरोमा के 100वें जन्मदिन के मौके पर उनसे मिलने पहुंची थीं. बोरोमा का आशीर्वाद मिलना पूरे मतुआ समुदाय का साथ मिलने जैसा होता है. चुनाव में इस इलाके में ये समुदाय हारने और जिताने में अहम भूमिका निभाता है. मतुआ समुदाय मुख्य रूप से बांग्लादेश से आए छोटी जाति के हिंदू शरणार्थी हैं और इन्हें लगभग 70 लाख की जनसंख्या के साथ बंगाल का दूसरा सबसे प्रभावशाली अनुसूचित जनजाति समुदाय माना जाता है. बनगांव लोकसभा क्षेत्र में 50 फीसदी से ज्यादा मतुआ समुदाय के लोग हैं. हालांकि प्रदेश के विभिन्न दक्षिणी जिलों में इस समुदाय की जनसंख्या लगभग एक करोड़ है, जो प्रदेश की कुल 294 विधानसभा सीटों में से कम से कम 74 सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं.