बलांगीर (ओडिशा) : पीएम नरेन्द्र मोदी ओडिशा में मंगलवार को अपने व्यस्त दौरे के बीच छत्तीसगढ़ में एक नक्सली हमले में मारे गए दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू के परिवार से मिले और दुखी मां और पिता को ढांढस बंधाया. इस दौरे में पीएम प्रधानमंत्री मोदी ने ओडिशा में 1,550 करोड़ रुपए की परियोजनाओं का उद्धाटन किया है और इसके बाद एक जनसभा को संबोधित किया है.

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पीएम मोदी ने मृत कैमरामैन अच्युतानंद साहू के माता, पिता से बातचीत की और परिवार के प्रति पूरी संवेदना जताई. बता दें कि बीते 30 अक्टूबर 2018 को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के अरनपुर के नीलावाया जंगल में हुए नक्सली हमले में दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू भी मारे गए थे. इस नक्सलियों से मुठभेड़ में इंस्पेक्टर रूद्र प्रताप सिंह एवं सहायक आरक्षक मंगलूराम शहीद हो गए थे, जबकि दो जवान, आरक्षक विष्णु नेताम एवं सहायक आरक्षक राकेश कौशल गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे.

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दिल्ली से आए रिपोर्टर के साथ गए थे कैमरामैन
बाबूसराय के रहने वाले दूरदर्शन के रिपोर्टर धीरज साहू दिल्ली से अपने कैमरामैन अच्युतानंद के साथ 27 अक्टूबर को रायपुर से जगदलपुर पहुंचे थे. 28 अक्टूबर को जगदलपुर में उन्होंने कुछ कवरेज किया और 29 अक्टूबर की शाम दंतेवाड़ा के लिए रवाना हुए. पोटाली एक ऐसा गांव था, जहां पहली बार मतदान केंद्र बनाया गया था. इसके कवरेज के लिए दंतेवाड़ा से अरनपुर गए.

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45 मिनट तक गोली बारी होती रही
दूरदर्शन के रिपोर्टर धीरज साहू  जब नीलावाया के पास मोटरसाइकल में सवार होकर पहुंचे तो आगे  कैमरामैन अच्युतानंद बैठे हुए थे. सड़क कार्य चल रहा था, तभी अचानक किनारे झाड़ियों में घात लगाए बैठे नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी. पहली गोली कैमरामैन अच्युतानंद को लगी थी और उसके बाद 45 मिनट तक गोली बारी होती रही. इसी बीच मोटरसाइकिल  एक गड्ढ़े में जा गिरी.

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जिस गांव में पहली बार वोटिंग होनी थी, वहां गए थे रिपोर्टिंग के लिए
धीरज ने बताया कि इसके बाद उनके सिर के ऊपर से 50 से अधिक गोलियां निकली. ग्रेनाइड बम भी फटा, सांस रोके पड़े रहे. पुलिस वालों ने भी फायरिंग की इसी बीच नक्सली भाग गए. धीरज साहू ने बताया कि पोटली ग्राम में पहली बार मतदान हो रहा था, इसके प्रचार-प्रसार के लिए जा रहे थे. उन्होंने कहा, “हमने सुना था नक्सली ने एक प्रेस नोट जारी कर पत्रकारों से कहा था कि वे अंदरूनी क्षेत्र में बेखौफ रिपोर्टिग कर सकते हैं, उसके बाद भी नक्सलियों ने पत्रकारों को नहीं छोड़ा. “