नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार यानी आज गुटनिरपेक्ष देशों (Non-Aligned Movement) के सम्मेलन में भाग लेंगे. पीएम मोदी आज शाम 4.30 बडे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस वीडियो सम्मेलन में भाग लेंगे. इस सम्मेलन के कई देशों के नेता भाग लेंगे. इस दौरान कोरोमा महामारी से निपटने को लेकर चर्चा हो सकती है. गुटनिरपेक्ष का नाम सामने आते ही हमारे दिमाग में ख्याल इतिहास के वक्त का आता है. आज हम आपको इस बारे में बताएंगे कि आखिर गुटनिरपेक्ष आंदोलन क्या था और जवाहर लाल नेहरू से इसका क्या वास्ता रहा है. Also Read - ब्रिटेन में पीएम के मुख्‍य सलाहकार ने किया था लॉकडाउन का उल्लंघन, उप मंत्री ने दिया इस्तीफा

साल 1961 में गुटनिरपेक्ष संगठन की स्थापना की गई. इसके निर्माताओं में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, मिस्त्र के पूर्व राष्ट्रपति गमाल अब्दुल नासर और युगोस्लाविया के राष्ट्रपति जोसिप ब्रॉज टीटो ने का नाम सबसे उपर आता है. आज के वक्त कुल 120 देश गुटनिरपेक्ष संगठन के सदस्य हैं. साथ ही 17 पर्यवेक्षक देश इसका हिस्सा हैं. यह यूनाइटेड नेशन के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी संस्था है. Also Read - हरभजन-युवराज के बयान पर आफरीदी का पलटवार; कहा- उन्हें पता है कि उनके देश में लोगों पर अत्याचार हो रहा है

गुटनिरपेक्ष आंदोलन की शुरूआत की बात करें तो दूसरे विश्व युद्ध के बाद दुनिया टदो धड़ों में विभाजित हो गई थी. इस दौरान एक धड़ा अमेरिका का पक्षधर था वहीं दूसरा धड़ा सोवियत यूनियन (रूस) का समर्थक. दुनिया के ज्यादातर देश इस दौरान चल रहे शीत युद्ध में रूस और अमेरिका के खेमे में विभाजित हो गए. अमेरिकी खेमा पूंजीवाद को बढ़ावा दे रहा था. वहीं सोवियत खेमा समाजवाद को बढ़ावा दे रहा था. इस दौरान कई देश आजाद हुए थे. वे अपने विकास को ध्यान में रखकर चलना चाहते थे. साथ ही आजादी के तुरंत बाद वे किसी देश से दुश्मनी नहीं करना चाहते थे. ऐसे में कुछ देशों के समूह ने मिलकर गुटनिरपेक्ष संगठन बनाया जिसे गुटनिरपेक्ष आंदोलन भी कहा जाता है. Also Read - पीएम मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति और मॉरीशस के प्रधानमंत्री से की बात, बोले, संकट में साथ खड़ा है भारत

हालांकि यह पहली बार है जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन में भाग लेने वाले हैं. इससे पहले कई भारतीय प्रधानमंत्री जैसे जवाहरलाल नेहरू और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस सम्मेलन का हिस्सा रह चुके हैं. इस सम्मेलन में पाकिस्तान भी भाग लेने वाला है, क्योंकि आजादी के वक्त भारत और पाकिस्तान दोनों ने इस संगठन में शामिल होने का फैसला किा था.