नई दिल्ली: पुलिस स्मारक दिवस के मौके पर रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पुलिस स्मारक का उद्घाटन किया. इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि मैं पुलिसकर्मियों के शौर्य को नमन करता हूं. हर वीर वीरांगना को शत शत नमन. आज का दिन देश के लिए जीवन समर्पित करने वालों को याद करने का दिन है. हर मौसम, हर त्‍योहार, हर समय पुलिस देशसेवा के लिए तैयार रहती है. मैं पुलिसकर्मियों के परिवार को भी शत-शत नमन करता हूं. पीएम मोदी ने कहा कि राष्‍ट्रीय पुलिस स्‍मारक के निर्माण में कई अड़ंगे लगाए गए. देश के वीरों के लिए पहले की सरकारों ने बेरुखी दिखाई. हमारी सरकार ने वीरों को सम्‍मान दिया.

पीएम मोदी ने कहा कि नॉर्थ ईस्ट में डटे हमारे साथियों का शौर्य और बलिदान भी अब शांति के रूप में दिखने लगा है. शांति और समृद्धि का प्रतीक बन रहे हमारे उत्तर-पूर्व के विकास में आपका भी योगदान है. देश के नक्सल प्रभावित जिलों में जो जवान अभी ड्यूटी पर तैनात हैं, उनसे भी मैं यही कहूंगा कि आप बेहतरीन काम कर रहे हैं और शांति स्थापना की दिशा में आप तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे राष्ट्र सेवा और समर्पण की अमर गाथा के प्रतीक,राष्ट्रीय पुलिस मेमोरियल को देश को समर्पित करने का अवसर मिला है.

उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में समर्पित प्रत्येक व्यक्ति को, यहां उपस्थित शहीदों के परिवारों को मैं पुलिस स्मृति दिवस पर नमन करता हूं. आज का ये दिन आप सभी की सेवा के साथ-साथ, आपके शौर्य और उस सर्वोच्च बलिदान को याद करने का है, जो हमारी पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स की परिपाटी रही है. अपनी सरकार का बखान करते हुए उन्होंने कहा कि 2014 में जब NDA की सरकार बनी तो हमने बजट आवंटन किया और आज ये भव्य स्मारक देश को समर्पित की जा रही है. ये हमारी सरकार के काम करने का तरीका है. आज समय पर लक्ष्यों को प्राप्त करने की कार्यसंस्कृति विकसित की गई है.

पीएम मोदी के साथ इस दौरान लालकृष्‍ण आडवाणी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे. राष्‍ट्रीय पुलिस स्‍मारक शहीद पुलिसकर्मियों की याद में बनाया गया है. इस स्मारक में एक नया संग्रहालय भी बनाया गया है. बता दें कि 1959 में लद्दाख में चीनी सेना के हमले में मारे गए पुलिसकर्मियों की याद में पुलिस स्‍मृति दिवस मनाया जाता है. पूर्व गैर भाजपाई सरकारों को घेरते हुए मोदी ने इस काम का श्रेय अटल जी और आडवाणी को देते हुए कहा कि मैं मानता हूं कि कानूनी वजहों से कुछ वर्ष काम रुका, लेकिन पहले की सरकार की इच्छा होती, उसने दिल से प्रयास किया होता, तो ये मेमोरियल कई वर्ष पहले ही बन गया होता, लेकिन पहले की सरकार ने आडवाणी जी द्वारा स्थापित पत्थर पर धूल जमने दी.