नई दिल्ली लगभग एक महीने तक चलने वाला संसद का शीतकालीन सत्र मंगलवार को शुरु हो गया. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वह चाहते हैं कि इस सत्र का ज्यादा से ज्यादा उपयोग जनहित के लिए हो. पार्टियों को दलहित से ऊपर उठकर इस सत्र में भाग लेना चाहिए. बता दें कि इससे पहले पीएम मोदी ने बीजेपी कोर कमेटी की एक बैठक भी बुलाई है. संसद भवन में ही यह बैठक होगी. बताया जा रहा है कि इसमें पांच राज्यों में नतीजों पर समीझा होगी.

अगले साल प्रस्तावित लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार के कार्यकाल का यह अंतिम पूर्ण सत्र होगा. सत्र की शुरुआत के साथ ही मंगलवार को दोपहर तक मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम विधानसभा चुनाव के परिणाम से स्पष्ट हो जायेगा कि इन राज्यों में भाजपा और कांग्रेस में से किसकी सरकार बनेगी. इस बीच सत्तापक्ष की कोशिश राज्यसभा में लंबित तीन तलाक विधेयक को पारित कराने का रास्ता साफ करने की होगी. सरकार पहले ही तीन तलाक को अपराध घोषित करने के लिये अध्यादेश जारी कर चुकी है.

ये रहेंगे प्रमुख मुद्दे
इसके अलावा सरकार भारतीय चिकित्सा परिषद संशोधन और भारतीय कंपनी कानून में संशोधन के अध्यादेश को विधेयक के रूप में इसी सत्र में पारित कराने की भरपूर कोशिश करेगी. शीतकालीन सत्र सामान्य तौर पर नवंबर माह में आहूत किया जाता रहा है लेकिन पिछले दो साल से यह दिसंबर माह में आहूत किया जा रहा है. इस बीच विपक्षी दलों ने लड़ाकू विमान राफेल की खरीद में हुयी कथित रूप से 58 हजार करोड़ रुपये की गड़बड़ी की जांच संयुक्त संसदीय समिति से कराने की मांग आगामी सत्र के दौरान जोरशोर से दोनों सदनों में उठाने की घोषणा कर दी है.

आरबीआई भी हो सकता है मुद्दा
विपक्ष भारतीय रिजर्व बैंक की स्वायत्तता का मुद्दा भी शीतकालीन सत्र में उठाएगा. सत्तापक्ष द्वारा शीतकालीन सत्र में पेश किये जाने वाले 45 विधेयक संसदीय कार्य मंत्रालय की सूची में शुमार हैं. इनमें जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक विधेयक, राष्ट्रीय होम्योपैथी विधेयक और वायुयान (संशोधन) विधेयक 2018 सहित अन्य अहम विधेयक शामिल हैं.