नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Prime Minister, Narendra Modi के “परीक्षा पे चर्चा” Pariksha Pe Charcha कार्यक्रम में भाग लेने के लिए इस बार मानव संसाधन विकास मंत्रालय को छात्रों से 2.5 लाख से अधिक प्रविष्टियां मिली हैं, जो पिछले साल की तुलना में करीब एक लाख अधिक है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 20 जनवरी को आयोजित ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में पहली बार देशभर से 50 दिव्यांग स्कूली छात्र भाग लेंगे.

इस बार कार्यक्रम का आयोजन 20 जनवरी को होगा, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी छात्रों और शिक्षकों के साथ परीक्षा के तनाव पर बातचीत करेंगे. यह कार्यक्रम का तीसरा संस्करण होगा. मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने उन छात्रों का चयन किया है, जो पांच विषयों पर उनके द्वारा प्रस्तुत निबंधों के आधार पर प्रधानमंत्री से सवाल पूछेंगे.

50 दिव्यांग छात्र भी ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में होंगे शामिल

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव आरसी मीना ने कहा, ”पहली बार देश के विभिन्न हिस्सों से 50 दिव्यांग छात्र कार्यक्रम में शामिल होंगे और उन्हें प्रधानमंत्री से बातचीत करने का अवसर मिलेगा.”

परीक्षा के तनाव से निपटना से पर प्रतियोगिता से हुआ चयन
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने कहा, ”इन दिव्यांग बच्चों का चयन ‘परीक्षा के तनाव से निपटना’ विषय पर एक पेंटिंग प्रतियोगिता के जरिए किया गया. आयोजन स्थल पर सर्वश्रेष्ठ पेंटिंगों को भी प्रदर्शित किया जाएगा.”

परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 2.6 लाख छात्रों की प्रविष्‍ट‍ियां मिलीं
कार्यक्रम में कुल 2000 विद्यार्थी और शिक्षक भाग लेंगे, जिनमें से 1050 छात्रों का चयन एक निबंध प्रतियोगिता के माध्यम से किया गया है. उन्होंने बताया कि पिछले साल करीब 1.4 लाख छात्रों की प्रविष्टियां देशभर से मिली थीं. इस बार यह संख्या बढ़कर लगभग 2.6 लाख हो गई है.

इस साल यह सत्र 16 जनवरी को होना था
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में आयोजित ऐसे सत्र में छात्रों के 10 प्रश्नों के उत्तर दिए थे और पिछले साल 16 सवाल लिए थे. पहले इस साल यह सत्र 16 जनवरी को होना था, लेकिन देशभर में विभिन्न पर्वों की वजह से इसे टाल दिया गया.

देश के 8.5 करोड़ से अधिक छात्रों ने पीएम का कार्यक्रम देखा या सुना था
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “पिछले साल, देश भर के 8.5 करोड़ से अधिक छात्रों ने दूरदर्शन, टीवी चैनलों और रेडियो चैनलों के जरिए कार्यक्रम देखा या सुना था.”