नई दिल्ली:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को प्रवासी श्रमिकों के लिए 50,000 करोड़ रुपये की रोजगार गारंटी योजना का आज बिहार में शुभारंभ करेंगे. कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन के बीच बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक अपने गांवों को लौट गए हैं और वहां उन्हें रोजगार की समस्या आ रही है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने प्रवासी मजदूरों को सशक्त बनाने के लिए गरीब कल्याण रोजगार अभियान की शुरुआत की है. Also Read - Lockdown in UP: 55 घंटों के लिए लागू हुआ लॉकडाउन, खुले रहेंगे धार्मिक स्थल, जानें कहां रहेगी सख्ती और कहां मिलेगी छूट

‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ नाम की यह योजना मुख्य रूप से उन छह राज्यों पर केंद्रित होगी, जहां सबसे अधिक प्रवासी श्रमिक अपने घरों को लौटे हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को इस अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि इस बड़ी ग्रामीण रोजगार योजेना से घर लौटे श्रमिकों को सशक्त किया जा सकेगा और उन्हें 125 दिन का रोजगार मिलेगा. Also Read - Coronavirus: महाराष्‍ट्र के कुछ जिलों में लॉकडाउन बढ़ाया, कल से इन शहरों में लागू होगा कर्फ्यू

प्रधानमंत्री मोदी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी की मौजूदगी में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये आज ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ का शुभारंभ करेंगे. यह अभियान बिहार के खगड़िया जिले के बेलदौर प्रखंड के तेलिहर गांव से शुरू किया जाएगा. बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं. Also Read - एम्स दिल्ली के निदेशक का बड़ा बयान, ऐसे लॉकडाउन से नहीं रुकेगा कोरोना, संक्रमण में फिलहाल नहीं आएगी कमी

सीतारमण ने कहा, ‘‘इस अभियान के लिए बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओड़िशा के 116 जिलों में प्रत्येक से 25,000 श्रमिकों को इस अभियान के लिए चुना गया है. इनमें 27 पिछड़े जिले भी शामिल हैं. इन जिलों के तहत करीब 66 प्रतिशत प्रवासी श्रमिक आएंगे. छह राज्यों के 116 जिलों के गांव इस कार्यक्रम से साझा सेवा केंद्रों (सीएससी) और कृषि विज्ञान केंद्रों के जरिये जुड़ेंगे. कोविड-19 महामारी के मद्देनजर सामाजिक नियमों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा.

यह अभियान 125 दिनों का है जिसमें प्रवासी मजदूरों को रोजगार मुहैया कराने के लिए 25 अलग तरह के कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा. साथ ही इसके जरिये देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा खड़ा किया जाएगा. इसके लिए 50,000 करोड़ रुपये के संसाधन लगाए जाएंगे. सीतारमण ने कहा कि यह 50,000 करोड़ रुपये बजट का हिस्सा है. उन्होंने कहा, ‘‘एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि हम सभी जिलों में घर लौटे श्रमिकों से सीधे संपर्क कर रहे हैं. सभी संपत्ति सृजन का हिस्सा होंगे.’’

उन्होंने कहा कि इस योजना का समन्वय 12 अलग-अलग मंत्रालय करेंगे जिनमें ग्रामीण विकास, पंचायती राज, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, खनन, पेयजल एवं स्वच्छता, पर्यावरण, रेलवे, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, सीमा सड़क, दूरसंचार और कृषि मंत्रालय शामिल हैं.

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार की 25 योजनाओं को एक साथ लाया जाएगा और ये श्रमिक ग्राम पंचायत भवन और आंगनवाड़ी केंद्र, राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे और जल संरक्षण परियोजनाओं में काम करेंगे. सीतारमण ने कहा, ‘‘हम 116 जिलों में 25 अलग-अलग कार्यों के लिए पैसा पहले ही डाल देंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि इन जिलों के सभी प्रवासी श्रमिकों को रोजगार मिल सके.’’

यह पूछे जाने पर कि पश्चिम बंगाल को इस अभियान में क्यों नहीं शामिल किया गया, ग्रामीण विकास मंत्री एन एन सिन्हा ने कहा कि जब यह कार्यक्रम तैयार किया जा रहा था उस समय राज्य ने अपने घर लौटने वाले श्रमिकों का आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया था. उन्होंने कहा, ‘‘कम से कम 25,000 प्रवासी श्रमिकों वाले अन्य जिले के इस अभियान में शामिल होने पर कोई रोक नहीं है. यदि हमें आंकड़ा मिलेगा, तो भविष्य में निश्चित रूप से उन्हें इसमें शामिल किया जाएगा.’’

इस सवाल पर कि क्या इस कार्यक्रम को 125 दिन से आगे बढ़ाया जा सकता है, सीतारमण ने कहा कि हम उन्हें चार महीने की स्पष्ट रूपरेखा दे रहे हैं. ‘‘आगे चलकर देखते हैं कि कितने श्रमिक रुके रहते हैं. सरकार एक वृहद रूपरेखा लेकर आई है जिसके जरिये उन्हें तत्काल आजीविका उपलब्ध कराई जाएगी.’’ उन्होंने बताया कि बिहार के 32 और उत्तर प्रदेश के 31 जिले इस अभियान का हिस्सा हैं. इस मौके पर श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा, ‘‘आपने पंजाब की खबर सुनी होगी कि श्रमिकों को रेल टिकट भेजकर वापस बुलाया जा रह है.’’ उन्होंने कहा कि जैसे स्थिति सामान्य होगी, चीजें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेंगी.