रोड एक्सीडेंट में घायलों का फ्री में होगा इलाज, सरकार ने शुरू की PM राहत स्कीम, जानें डिटेल

PM RAHAT: यह स्कीम देश की किसी भी कैटेगरी की सड़क पर हुए एक्सीडेंट पर लागू होगी. नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे या ग्रामीण सड़क किसी भी स्थान पर दुर्घटना होने पर घायल व्यक्ति इस सुविधा का लाभ उठा सकेगा.

Published date india.com Published: February 17, 2026 11:26 PM IST
रोड एक्सीडेंट में घायलों का फ्री में होगा इलाज, सरकार ने शुरू की PM राहत स्कीम, जानें डिटेल
सांकेतिक फोटो.

देशभर में हुए सड़क हादसों में 2025 में 1 लाख 80 हजार मौतें हुई हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, मरने वालों में 66% लोग 18 से 34 साल के युवा थे. किसी सड़क हादसे के बाद का एक घंटा ‘गोल्डन ऑवर’ कहलाता है. इस दौरान इलाज न मिल पाने से कई मौतें हो जाती हैं. इसी एक्सीडेंटल डेथ रेट को कम करने के मकसद से केंद्र सरकार ने PM RAHAT Scheme लॉन्च की है. इसके तहत सड़क हादसे में घायल लोगों को 7 दिनों तक मैक्सिमम 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा.

आइए जानते हैं क्या है ये स्कीम? किस तरह के हादसों पर इस स्कीम का फायदा ले सकते हैं? इसके लिए कौन से पेपर्स होने चाहिए? कैशलेस ट्रिटमेंट लेने का प्रोसेस क्या होगा:-

क्या है PM RAHAT?
मोदी सरकार ने सड़क हादसों में पीड़ितों की मदद के लिए PM RAHAT (Road Accident Victim Hospitalization and Assured Treatment) योजना शुरू की है. इसके तहत हादसा के 7 दिनों तक किसी भी नॉमिनेटेड हॉस्पिटल में 1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिलेगा.

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कहां हुए एक्सीडेंट पर मिलेगी हेल्प?
सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, यह स्कीम देश की किसी भी कैटेगरी की सड़क पर हुए एक्सीडेंट पर लागू होगी. नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे या ग्रामीण सड़क किसी भी स्थान पर दुर्घटना होने पर घायल व्यक्ति इस सुविधा का लाभ उठा सकेगा.

योजना से जुड़े नियम और शर्तें?

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  • PM राहत योजना के तहत दुर्घटना की तारीख से 7 दिनों तक प्रति व्यक्ति 1.5 लाख रुपये तक का खर्च सरकार उठाएगी.
    पेमेंट मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड से सीधे हॉस्पिटल को किया जाएगा.
  • इस स्कीम के तहत जिंदगी को खतरे में नहीं डालने वाले मामलों में ज्यादातर 24 घंटे तक और गंभीर मामलों में 48 घंटे तक स्टेबलाइजेशन इलाज उपलब्ध कराया जाएगा.
  • इसके बाद भी 7 दिनों की अवधि के अंदर कैशलेस इलाज की सुविधा जारी रहेगी.
  • यह पूरी प्रक्रिया इंटिग्रेटेड डिजिटल सिस्टम के जरिए होगी. इसमें पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी होगा.
  • एक्सीडेंट के जो मामले गंभीर नहीं हैं, उनमें 24 घंटे के अंदर और गंभीर मामलों में 48 घंटे के अंदर पुलिस की पुष्टि जरूरी होगी.

अगर घायल को बड़े हॉस्पिटल में रेफर करना पड़ा तो
अस्पताल को घायल के फर्स्ट एड के बाद बड़े अस्पताल में रेफर करना है, तो उस अस्पताल को तय करना होगा कि जहां रेफर किया जा रहा है, वहां मरीज को दाखिला मिले.अगर इलाज में डेढ़ लाख से ज्यादा का खर्च आता है, तो बढ़ा बिल मरीज या परिजन को भरना होगा.

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मरीज की इलाज के दौरान मौत हो जाए तो?
इस स्कीम के तहत रोड एक्सीडेंट से मौत होने पर परिजनों को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. भारत सरकार ने मुख्य रूप से हिट एंड रन जैसे मामलों में 2 लाख रुपये देने का प्रावधान बनाया है.इसे पाने के लिए ऊपर बताए गए 4 स्टेप फॉलो करने होंगे.

इस स्कीम के लिए कोई कार्ड भी बनवाना होगा?
दूसरी योजनाओं की तरह इस स्कीम का फायदा लेने के लिए अलग से कोई कार्ड या डॉक्यूमेंट्स नहीं बनवाने होंगे. इस स्कीम के तहत एक्सीडेंट होने पर घायल को सीधे अस्पताल ले जाकर भर्ती करवाना होगा, इसके बाद डॉक्यूमेंटेशन की प्रोसेस पूरी करनी होगी.

चंडीगढ़ में शुरू हुआ था पायलट प्रोजेक्ट
14 मार्च 2024 को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने चंडीगढ़ में सड़क दुर्घटना पीड़ितों को कैशलेस इलाज देने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था. चंडीगढ़ के बाद इस योजना को 5 और राज्यों तक बढ़ाया गया. इनमें राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश शामिल हैं. अब इसे देश में लागू किया गया है.

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