नई दिल्ली: पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’के मुद्दे पर विचार करने लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक समिति गठित करेंगे जो निश्चित समय-सीमा में अपनी रिपोर्ट देगी. सर्वदलीय बैठक के बाद सिंह ने मीडियाकर्मियों से कहा कि प्रधानमंत्री ने बैठक में कहा कि एक राष्ट्र, एक चुनाव के मुद्दे पर एक समिति गठित की जाएगी. उन्होंने कहा कि यह समिति निश्चित समय-सीमा में अपनी रिपोर्ट देगी. बता दें कि मोदी ने लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने तथा महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के आयोजन सहित अन्य मुद्दों पर सर्वदलीय बैठक बुलाई थी.

कांग्रेस के अलावा विपक्ष के प्रमुख नेताओं में बसपा अध्यक्ष मायावती, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया. हालांकि वाम दलों की ओर से माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार एवं अन्य नेता इसमें शामिल हुए.

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर कांग्रेस ने कहा- संसद में चर्चा कराए मोदी सरकार

बैठक में शामिल नहीं हुई कांग्रेस, बोली- संसद में चर्चा कराए सरकार
पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’और कुछ अन्य मुद्दों पर बुधवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस शामिल नहीं हुई और उसने कहा कि अगर सरकार चुनाव सुधारों को लेकर कोई कदम उठानी चाहती है तो वह संसद में इस विषय पर चर्चा कराए. कांग्रेस के अलावा विपक्ष के प्रमुख नेताओं में बसपा अध्यक्ष मायावती, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने हिस्सा नहीं लिया. हालांकि वाम दलों की ओर से माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार एवं अन्य नेता इसमें शामिल हुए.

पीएम विपक्ष की बातों को नजरअंदाज करते हैं
पार्टी सांसद गौरव गोगोई ने भाजपा पर दोहारा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को बैठक में शामिल होने का निमंत्रण मिला था, लेकिन वह खेद प्रकट करते हुए इसमें शामिल नहीं हुए. हम भी चाहते हैं कि चुनाव प्रक्रिया में सुधार हो. हमने गुजरात में राज्यसभा की दो सीटों पर एकसाथ उपचुनाव कराने की मांग की है. हमने कहा है कि मत पत्र से चुनाव कराए जाएं. हमने यह मुद्दा उठाया है कि इस चुनाव में बेतहाशा पैसे खर्च किए गए. दिक्कत है कि प्रधानमंत्री विपक्ष की बातों को नजरअंदाज करते हैं. एक राष्ट्र, एक चुनाव संविधान से जुड़ा विषय है. अगर सरकार चाहे तो चुनाव सुधार को लेकर संसद में चर्चा करा सकती है.

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पिछले दरवाजे से राष्ट्रपति शासन की कोशिश: माकपा
माकपा ने आरोप लगाया कि यह देश में संसदीय प्रणाली की जगह पिछले दरवाजे से राष्ट्रपति शासन लाने की कोशिश है. सर्वदलीय बैठक में भाग लेने के बाद माकपा नेता सीताराम येचुरी ने एक साथ चुनाव का विचार देश में संसदीय प्रणाली की जगह पिछले दरवाजे से राष्ट्रपति शासन लाने की कोशिश है. यह विचार असंवैधानिक और संघीय व्यवस्था के खिलाफ है. पहले भी एक साथ चुनाव हुए थे, लेकिन अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग किया गया. जब तक अनुच्छेद 356 रहेगा तब तक एक साथ चुनाव नहीं हो सकते.

व्यवस्था में अभी एक साथ चुनाव संभव नहीं
येचुरी के अनुसार बैठक में राकांपा के शरद पवार और भाकपा समेत कई दलों के नेताओं ने कहा कि फिलहाल की व्यवस्था में एक साथ चुनाव संभव नहीं हैं. संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत केन्द्र कुछ आपात स्थितियों में राज्य की चुनी हुई सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगा सकता है.

आप ने पर केंद्र से इस मुद्दे पर दृष्टिपत्र मांगा
आम आदमी पार्टी ने एक देश, एक चुनाव के मुद्दे पर संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी से एक दृष्टिपत्र मांगा है,जिससे कि मुद्दे पर एक सुविज्ञ और व्यापक स्तर की चर्चा हो सके. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बुधवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से दूर रहे और पार्टी सदस्य राघव चड्ढा को पार्टी का प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजा. चड्ढा ने जोशी को भेजे गए एक पत्र में कहा कि स्पष्ट दृष्टि या आधार की अनुपस्थिति में इस तरह के प्रस्ताव के गुण-दोषों पर टिप्पणी करना किसी भी राजनीतिक दल के लिए व्यर्थ होगा.

विधि आयोग सख्त कानूनी ढांचा के पक्ष में
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की सरकार की राय के बीच विधि आयोग ने इस तरह की विशाल कवायद के लिए सख्त कानूनी ढांचे की सिफारिश की है. आयोग द्वारा पिछले साल अगस्त में की गयी मसौदा सिफारिशों में संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून में संशोधन की बात की थी ताकि एक साथ चुनाव सुनिश्चित हो सकें.

विधि आयोग ने दो चरणों में चुनाव कराने की सिफारिश की थी
आयोग ने सिफारिश की थी कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव दो चरणों में कराए जा सकते है, बशर्ते संविधान के कम से कम दो प्रावधानों में संशोधन किए जाएं और बहुमत से राज्यों द्वारा उनका अनुमोदन किया जाए. आयोग के विचार से सहमति जताते हुए पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी एस कृष्णमूर्ति ने कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का विचार काफी आकर्षक है, लेकिन जन प्रतिनिधियों के लिए निर्धारित कार्यकाल की खातिर संवैधानिक संशोधन के बिना इसे लागू नहीं किया जा सकता.