नई दिल्ली: केन्द्र ने 11000 करोड़ रूपए से अधिक के पंजाब नेशनल बैंक घोटाले की स्वतंत्र जांच कराने और हीरों के अबरपति व्यापारी नीरव मोदी को वापस लाने के लिये विशेष जांच दल के गठन की याचिका का सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया. सरकार ने कहा कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है और जांच जारी है. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई. चन्द्रचूड़ की खंडपीठ ने कहा, ‘‘इस समय वह इस मामले के बारे में कुछ नहीं कह रही है.’’ पीठ ने इसके साथ ही वकील विनीत ढांडार की जनहित याचिका आगे सुनवाई के लिये 16 मार्च को सूचीबद्ध कर दी.Also Read - Ashes 2021: एशेज सीरीज के लिए 'भारत' से मिलेगी इंग्लैंड को मदद, खुद कप्तान Joe Root ने कर दिया खुलासा

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केन्द्र की ओर से अटार्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने कहा कि वह इस मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच शुरू हो जाने सहित कई बिन्दुओं पर जनहित याचिका का विरोध कर रहे हैं. जनहित याचिका में पंजाब नेशनल बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय तथा विधि एवं न्याय मंत्रालय को प्रतिवादी बनाया गया है. इसमें इस बैंकिंग धोखाधड़ी में कथित रूप से शामिल नीरव मोदी और अन्य को दो महीने के भीतर वापस लाने की कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया जाये. Also Read - दक्षिण अफ्रीका दौरे पर केवल टेस्ट और वनडे मैच खेलेगी टीम इंडिया, टी20 सीरीज को लेकर फैसला बाद में: जय शाह

याचिका में हीरों के व्यापारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की कथित संलिप्तता वाली इस धोखाधड़ी के मामले की विशेष जांच दल से जांच कराने का अनुरोध किया गया है. इसके अलावा, इसमें पंजाब नेशनल बैंक के शीर्ष प्रबंधन की भूमिका की भी जांच कराने का अनुरोध किया गया है. जांच ब्यूरो ने इस घोटाले के मामले में नीरव मोदी, उसके रिश्तेदार गीतांजलि जेम्स के मेहुल चोकसी और अन्य के खिलाफ 31 जनवरी को पहली प्राथमिकी दर्ज की थी और अब कुछ दिन पहले उसने एक अन्य प्राथमिकी भी दर्ज की है.