गुवाहाटी: असम के जोरहट और गुवाहाटी जिलों में जहरीली शराब त्रासदी में शनिवार तक मृतक संख्या बढ़कर 85 हो गई है जबकि 340 लोगों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है. मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने जोरहट मेडिकल कॉलेज अस्पताल (जेएमसीएच) में पीड़ितों से मुलाकात की और प्रत्येक मृतक के परिजनों को दो-दो लाख रुपये तथा अस्वस्थ हुए लोगों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान किया. सोनोवाल ने कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. उधर, असम में विपक्षी कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाये जा रहे. कांग्रेस ने प्रदेश के आबकारी मंत्री से इस्तीफे की मांग की. पुलिस के मुताबिक गोलाघाट में पूछताछ के लिए 12 लोगों को हिरासत में लिया गया है. शुक्रवार को इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था.

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार जोरहाट मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 46 लोगों की मौत हो गई. 35 और लोगों ने गोलाघाट सिविल अस्पताल में दम तोड़ दिया, वहीं तीताबोर उप-संभागीय अस्पताल में चार लोगों की मौत हो गयी. गोलाघाट और जोरहाट में बड़ी संख्या में चाय बागानों के श्रमिकों ने बृहस्पतिवार रात को जहरीली शराब पी ली थी जिसके बाद वे बीमार पड़ गये. उसी रात 12 मजदूरों की मौत हो गयी. असम के स्वास्थ्य मंत्री हेमंत विश्व शर्मा भी शनिवार को दोनों अस्पतालों में मरीजों से मिलने गए. उन्होंने कहा कि डिब्रूगढ़ जिले के असम मेडिकल कॉलेज अस्पताल, गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल और तेजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल, सोनितपुर जिले से चिकित्सकों को जोरहाट और गोलाघाट अस्पताल भेजा गया ताकि बड़ी संख्या में प्रभावित लोगों को चिकित्सकीय देखभाल मुहैया करायी जा सके.

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मंत्री ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा निदेशक अनूप बर्मन के अलावा असम के स्वास्थ्य निदेशक और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के निदेशक जोरहाट में हैं ताकि मरीजों को मुहैया करायी जा रही सेवाओं की निगरानी की जा सके. शर्मा ने कहा, ‘उम्मीद है कि बीमार लोगों को सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा इलाज मुहैया करा पाएंगे. दोनों अस्पतालों के चिकित्सक, नर्स और कर्मचारी मरीजों को सर्वश्रेष्ठ चिकित्सकीय देखभाल मुहैया करा रहे हैं…फिलहाल प्रमुख ध्यान इस बात पर है कि प्रभावितों को किस तरह से सर्वश्रेष्ठ इलाज मुहैया कराया जाए.’

जोरहाट में जहरीली शराब के चलते स्थिति को देखते हुए अस्पताल प्राधिकारियों को अन्य शिकायतों के साथ भर्ती होने वाले व्यक्तियों की संख्या सीमित करने को कहा है ताकि जहरीली शराब पीने के बाद बीमार हुए अधिकतम लोगों को वहां समायोजित कराया जा सके. अस्पताल प्राधिकारियों को जहरीली शराब पीड़ितों के साथ देखभाल के लिए आये लोगों को भोजन एवं अन्य सुविधाएं मुहैया कराने को कहा गया है. यह पूछे जाने पर कि क्या जहरीली शराब बेची जा रही है क्योंकि ताजा मामले सामने आ रहे हैं, शर्मा ने कहा, ‘‘जिन मरीजों में दो तीन दिन पहले दिक्कत हुई थी वे अब आ रहे हैं. कुछ ऐसे लोगों जिन्होंने पहले शराब पी थी वे जहरीली शराब घटना की खबर सुनकर भय के चलते इलाज के लिए आ रहे हैं. ये लोग मनोवैज्ञानिक तौर पर सदमे में हैं और इसलिए उन्हें लग रहा है कि वे बीमार हैं.’

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असम के मुख्यमंत्री सोनोवाल ने शुक्रवार को घटना की अपर असम डिवीजन कमिश्नर से जांच का आदेश दिया. उन्हें एक महीने रिपोर्ट देने को कहा गया है. इस सवाल पर कि घटना कैसे हुई, शर्मा ने कहा कि जांच पूरी होने पर यह सामने आएगा. राज्य के आबकारी मंत्री परिमल सुकलबैद्य ने विभाग के अधिकारियों की एक टीम को घटना की जांच करने का निर्देश दिया. अधिकारियों ने बताया कि आबकारी विभाग के दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है. वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने घटना की न्यायिक जांच की मांग की है. उन्होंने असम की भाजपा सरकार पर अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया.