अलीगढ़: साल 2017 में गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में 60 बच्चों की मौत के बाद सुर्खियों में आए डॉ.कफील पर अब नागरिकता संशोधन अधिनियम (Citizenship amendment Act) 2019 पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में हुई एक खुली बातचीत में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के चलते मामला दर्ज किया गया है. अलीगढ़ के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अभिषेक ने कहा कि उनके खिलाफ 13 दिसंबर को सिविल लाइंस पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए (धर्म, भाषा, नस्ल के आधार पर लोगों में नफरत फैलाना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी. उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जांच की जा रही है.

प्राथमिकी के मुताबिक, कफील ने अपने भाषण में कहा, “मोटा भाई सभी को हिंदू या मुसलमान बनाना सिखा रहे हैं, लेकिन इंसान बनाना नहीं. आरएसएस के अस्तित्व में आने के बाद से वह संविधान पर यकीन नहीं रखते हैं. नागरिकता कानून (सीएबी) मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक बना रहा है और इसके बाद उन्हें एनआरसी के कार्यान्वयन के साथ परेशान किया जाएगा.” कफील ने आगे कहा, “यह लड़ाई हमारे अस्तित्व के लिए है. हमें लड़ना होगा.” आरएसएस संचालित विद्यालयों में यह सिखाया जा रहा था कि जिनकी दाढ़ी है, वे आतंकी हैं.

कफील ने कहा कि सीएए के माध्यम से सरकार ने हमें बताया है कि यह देश हमारा नहीं है. प्राथमिकी में बताया गया है कि कफील ने अपने भाषण से शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने और सांप्रदायिक सद्भावना को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है. इसी बीच, नागरिकता (अधिनियम) कानून के खिलाफ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय परिसर में हो रहे प्रदर्शन के बीच भड़काऊ और हिंदुत्व विरोधी नारे लगाने वाले एक और अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है.

छात्रों के विरोध प्रदर्शन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. प्राथमिकी भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए (धर्म, भाषा, नस्ल के आधार पर लोगों में नफरत फैलाना) के तहत दर्ज की गई है. भारतीय जनता पार्टी के युवा कार्यकर्ता संदिग्धों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं, उनका दावा है कि वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के विद्यार्थी हैं.

(इनपुट-आईएएनएस)