हैदराबाद /नई दिल्‍ली/ लखनऊ. देश में आगामी 2019 के आम चुनाव के लिए गठबंधन की आवाजों के बीच नए चुनावी गठबंधन की सियासी रणनीति पर कई राजनीतिक पार्टियों ने अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं. अगर ये कोशिश अंजाम तक पहुंची तो केंद्र की सत्‍तारूढ़ बीजेपी की राह आसान नहीं होगी. हाल ही में उत्‍तर प्रदेश में दो लोकसभा सीटों के लिए हुए उपचुनाव में बीजेपी की हार के बाद विरोधी दलों की उम्‍मीद और उत्‍साह चरम पर है. यूपी उपचुनाव के ठीक पहले एक- दूसरे की धुर विरोधी एसपी और बीएसपी ने जिस तरह से नजदीकियां बढ़ाई तो पूरा चुनावी खेल ही बदल गया. इसके बाद बीजेपी विरोधी बड़ी पार्टियों समेत कई छोटे-छोटे क्षेत्रीय दल भी नए गठबंधन की संभावनाओं को खंगालने में जुट गए हैं. पिछले कुछ दिनों में विभिन्‍न राजनीतिक दलों के नेताओं के ऐसे बयान आए हैं, जिससे तीसरे बड़े राजनीतिक चुनावी गठबंधन के आसार तेजी से बढ़ रहे हैं.

लोकसभा चुनावों के लिए बन सकता है नया गठबंधन : भाकपा
हैदराबाद में रविवार को भाकपा पार्टी महासचिव एस. सुधाकर रेड्डी ने कहा कि उत्तरप्रदेश, बिहार और राजस्थान में उपचुनावों के परिणाम संकेत देते हैं कि भाजपा का जनाधार कम हो रहा है और राजग की प्रमुख पार्टी से लोग भ्रमित महसूस कर रहे हैं. रेड्डी ने कहा, ”बदलाव की संभावना है. बदलाव वह नीति है, जिसके बारे में भाकपा शुरू से ही बात करती रही है. सीधा मुकाबला होना चाहिए, अगर नहीं तो सभी दलों में अखिल भारतीय स्तर पर आपसी समझ बने. इसलिए मुझे उम्मीद है कि अधिकतर लोकसभा सीटों पर ऐसा होगा. उत्तरप्रदेश में उपचुनाव परिणामों के बाद हम समझते हैं कि देश में यह भाजपा शासन के खात्मे की शुरुआत है.”

बीजेपी को रोकने का काम क्षेत्रीय ताकतें ही कर सकती हैं : अखिलेश
लखनऊ में रविवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा उत्तर प्रदेश की मौजूदा भाजपा सरकार ने अपने एक साल के कार्यकाल में कोई उल्लेखनीय काम नहीं किया है. मुद्दों से भटकाना इस दल का चरित्र है और उसे रोकने का काम क्षेत्रीय ताकतें ही कर सकती हैं. उन्‍होंने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार के चार साल और उत्तर प्रदेश में भाजपा की एक साल की सरकार से जनता का मोहभंग हो गया है. इसका असर गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों के उपचुनावों के नतीजों में दिखाई दिया है. जनता भाजपा को नकार रही है. इसका पूरा नतीजा 2019 में सामने आ जाएगा.

कांग्रेस समान विचारधारा की पार्टी से गठबंधन करने को तैयार
कांग्रेस ने शनिवार को 2019 लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी सरकार को हराने के लिए समान विचारधारा की पार्टी से गठबंधन करने इच्छा बताई. पार्टी ने अपने अधिवेशन के दौरान राजनीतिक संकल्प में कहा, “कांग्रेस 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा-आरएसएस को हराने के लिए समान विचारधारा की पार्टी से गठबंधन करने के लिए एक व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाएगी और एक सामान्य व्यवहारिक कार्यक्रम विकसित करेगी.”

टीआरएस चीफ के.चंद्रशेखर राव ममता बनर्जी से मिलेंगे
साल 2019 के चुनाव से पहले विपक्षी पार्टियों का एक मजबूत मोर्चा बनाने की कोशिशों के बीच तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चन्द्रशेखर राव की सोमवार को कोलकाता में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात करने की संभावना है. हाल ही में राव ने भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ तीसरा मोर्चा गठित करने का सुझाव दिया था.

ममता दे चुकी हैं तीसरे मोर्चे का सुझाव
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख मतता बनर्जी भाजपा नेतृत्व वाली राजग सरकार के खिलाफ विपक्षी पार्टियों को एक साथ लाने में भूमिका निभा रही हैं, ताकि आगामी चुनाव में बीजेपी को सत्ता से हटाया जा सके. हाल ही में तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने हाल में ही एक तीसरे मोर्चे के गठन का प्रस्ताव दिया था. वहीं, राव का कहना है कि ममता बनर्जी ने उन्हें फोन करके उनके प्रस्ताव का समर्थन किया है.

आजम को भी पसंद है सपा-बसपा का साथ
लखनऊ में समाजवादी पार्टी नेता आजम खान को भी बसपा के समर्थन से उपचुनाव में मिली जीत के बाद सपा-बसपा का साथ पसंद आ रहा है. उन्होंने कहा, “मैं ऐसे लोगों से कहना चाहता हूं कि कभी-कभी बहुत सी चीजें अच्छी नहीं लगती पर उन्हें अच्छी नहीं लगने के बावजूद मानना पड़ता है।” आजम ने कहा कि लोग कहते हैं कि सपा और बसपा कैसे साथ हो सकते हैं, ये वो लोग कह रहे हैं, जिनको यह जोड़ अच्छा नहीं लग रहा है. बसपा से गठबंधन की बात पर आजम ने कहा कि किसी को साथ लेने के लिए दूसरों के मापदंड के साथ काम किया जाता है. ऐसे में हमें अपने गिले-शिकवे दूर करके साथ आना चाहिए.


बीजेपी के साथी दल भी विरोध में उठ खड़े हुए
ऐसे सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्‍या वाकई में बीजेपी के खराब दिनों की शुरुआत हो चुकी है. एनडीए छोड़कर आंध्र प्रदेश की टीडीपी नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाने तक उतर आई. शिवसेना पहले से ही आगामी लोकसभा चुनाव अलग से लड़ने का ऐलान कर चुकी है. बिहार की छोटी पार्टियों का भी रुख बदलने लगा है और एलेजपी नेता राम विलास पासवान भी पार्टी ने नेताओं को बयानों पर नसीहत देते नजर आ रहे हैं. (इनपुट- एजेंसी)