नई दिल्ली: आर्थिक रूप से कमजोर, सामान्य वर्ग के लोगों को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण देने के सरकार के फैसले को कांग्रेस ने ‘चुनावी जुमलेबाजी’ करार देते हुए सोमवार को आरोप लगाया कि आम चुनाव से पहले सरकार सिर्फ दिखावा कर रही है. पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्वीट कर कहा, ‘क्या आपने इस बारे में चार साल और आठ महीने तक सोचा? निश्चित तौर पर आचार संहिता लागू होने से तीन महीने पहले इस चुनावी जुमलेबाजी के बारे में सोचा गया. उन्होंने कहा, ‘आप जानते हैं कि आप कोटा की सीमा को 50 फीसदी से ज्यादा नहीं कर सकते. इसलिए आप यह दिखाना चाहते हैं कि आपने प्रयास किया, लेकिन नहीं हो पाया.

आम आदमी पार्टी ने मोदी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है. आप के प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि चुनाव के पहले भाजपा सरकार संसद में संविधान संशोधन करे. हम सरकार का साथ देंगे. नहीं तो साफ हो जाएगा कि ये मात्र भाजपा का चुनाव के पहले का स्टंट है. आप नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने ट्वीट किया, आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्ण जातियों के लिये मोदी सरकार ने 10% आरक्षण का स्वागत योग्य चुनावी जुमला छोड़ दिया है,ऐसे कई फ़ैसले राज्यों ने समय-समय पर लिये लेकिन 50% से अधिक आरक्षण पर कोर्ट ने रोक लगा दी क्या ये फ़ैसला भी कोर्ट से रोक लगवाने के लिये एक नौटंकी है?

ऑल इंडिया मज्लिस ए इतेहदुल मुसलिमीन ने नेता और सांसद असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि आरक्षण दलितों के साथ ऐतिहासिक अन्याय को सही करने के लिए है. गरीबी मिटाने के लिए कोई भी कई योजनाएं चला सकता है, लेकिन आरक्षण न्याय के लिए बना है. संविधान आर्थिक आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता है. दलित नेता और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार का ये फैसला काफी अच्छा है, इससे समाज के एक बड़े तबके को लाभ होगा. उन्होंने कहा कि सवर्णों में भी कई ऐसे लोग हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं.

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव का कहना है कि आरक्षण का उद्देश्य गरीबी खत्म करना नहीं है. आरक्षण का उद्देश्य समाजिक रूप से पिछड़े लोगों को प्रतिनिधित्व देना है. अगर पीएम मोदी लोगों की गरीबी दूर करना चाहते हैं तो उन्हें सबके खाते में 15-15 लाख रुपए जमा करना चाहिए. बीएसपी नेता और राज्यसभा सांसद सतीश मिश्रा का कहना है कि बि‍ल को आने दीजिए ऐसा होना बहुत मुश्किल है. ये झूठ बोल रहै हैं.

रालोसपा के प्रमुख और हाल में एनडीए से अलग हुए उपेंद्र कुशवाहा का कहना है कि देश में जिन्‍हें पहले से आरक्षण मिला है उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ है. पहले इनकी स्थिति ठीक हो जाए उसके बाद ही सरकार दूसरे के लिए कुछ सकती है. लेकिन ये जुमला है और कुछ नहीं है. एलजेपी नेता चिराग पासवान ने कहा कि उनकी पार्टी इस कदम का स्वागत करती है. गरीबी की एक जाति होती है. हम चाहते थे 15 फीसदी, लेकिन 10 फीसदी मिला है. पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने सवाल उठाया है कि क्या ये सिर्फ एक चुनावी जुमला ही तो नहीं है. उन्होंने कहा कि पिछले काफी दिनों से संसद चल रही थी ऐसे में आखिरी दिनों में इस प्रकार का फैसला करना सिर्फ सरकार का नया नाटक है.