नई दिल्ली: चुनाव आयोग Election Commission of India ने सुप्रीम कोर्ट Supreme Court में शुक्रवार को कहा कि चुनावी उम्मीदवारों को इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि के बारे में घोषणा करने के 2018 के उनके निर्देश से राजनीति के अपराधीकरण पर रोक लगाने में मदद नहीं मिल रही है. Also Read - West Bengal Assembly Elections 2021 Opinion Poll: बंगाल में फिर एक बार ममता सरकार! लेकिन 3 से 100 पर पहुंच सकती है भाजपा; जानिए क्या है जनता का मूड

चुनाव आयोग Election Commission ने कहा कि उम्मीदवारों से उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि की मीडिया में घोषणा करने के बारे में कहने के बजाए राजनीतिक दलों से कहा जाना चाहिए कि वे आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट ही न दें. Also Read - बीजेपी ने काउंटर नारे से ममता बनर्जी पर साधा निशाना, कहा- बंगाल को अपनी बेटी चाहिए, बुआ नहीं

जस्टिस आर.एफ. नरीमन और न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट्ट की पीठ ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह देश में राजनीति के अपराधीकरण को रोकने के मद्देनजर रूपरेखा बनाकर एक सप्ताह के भीतर अदालत में पेश करें. Also Read - Mamata Banerjee On Election Date: ममता बनर्जी ने बंगाल में 8 चरणों में वोटिंग पर उठाए सवाल, कही यह बात...

शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता भाजपा नेता (BJP leader) एवं अधिवक्ता (advocate) अश्विनी उपाध्याय (Ashiwini Upadhyay) और चुनाव आयोग से कहा कि वह साथ मिलकर विचार करें और सुझाव दें, जिससे राजनीति में अपराधीकरण पर रोक लगाने में मदद मिले.

सितंबर 2018 में पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाया था कि सभी उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से पहले चुनाव आयोग के समक्ष अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि की घोषणा करना होगी. उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि के बारे में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में व्यापक प्रचार करने को भी कहा गया था.