नई दिल्ली: वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को लोकसभा में आम बजट 2018-19 पेश किया. इस मौके पर कई बड़ी योजनाओं का शुभारंभ करने के साथ ही कुछ चीजें मंहगी हुईं तो कुछ सस्ती भी. बजट भाषण में अरुण जेटली ने स्वरोजगार को बढ़ावा दने के लिए कई नई योजनाओं की घोषणा की. शनिवार को इस बजट पर जेटली ने हमारे सहयोगी चैनल जी बिजनेस से बात की. उन्होंने हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम से लेकर लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ संबंधी कई प्रश्नों के जबाव दिए.Also Read - Kangana Ranaut Padma Shri Award: पद्मश्री से नवाजी गईं कंगना रनौत, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दी बधाई, बजने लगी तालियां

जेटली ने कहा कि 2018-19 का संघ बजट पिछले साल की तुलना में एक अलग बजट है. हमने पिछले चार वर्षों में कई योजनाएं शुरू की हैं. सरकार ने उन पहलुओं पर जोर दिया जो इस अवधि में शामिल नहीं किए जा सके. उन्होंने कहा कि उन्होंने मध्यम वर्ग का ख्याल रखने के लिए 12000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं. Also Read - बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा 74 प्रतिशत करने संबंधी विधेयक राज्यसभा में पेश

बढ़े हुए सीमा शुल्क पर प्रतिक्रिया देते हुए जेटली ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य देश में नौकरियों में वृद्धि करना है. उन्होंने कहा  “हमने पिछले दशकों में उपभोक्ता, वस्तुओं के उत्पादन के लिए प्रौद्योगिकियों को विनियोजित किया है अब, हमारी कंपनियां दुनिया के बाकी हिस्सों में माल निर्यात कर रही हैं इस प्रकार, इस कदम से देश को लंबे समय तक मदद मिलेगी. ” Also Read - गुजरात: वित्त मंत्री ने 2.27 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक बजट पेश किया, शिक्षा के लिए नई योजनाएं होंगी शुरू

किसानों के लिए फसलों पर अधिकतम निर्धारित मूल्य पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि इसका असर बहुत कम होगा और इससे मंहगाई नहीं बढ़ेगी.

जेटली ने कहा वित्तीय चुनौतियों का सामना करने के मामले में यह एक चुनौतीपूर्ण बजट था फिर भी हम रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था को मजबूत रखने के बीच संतुलन बनाए रखने में कामयाब रहे. उन्होंने कहा कि टैक्स देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है.

आयुष्मान भारत के संबंध में जेटली ने कहा कि सरकार ने 40 प्रतिशत आबादी वाले गरीब तबके को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए ये कदम उठाया है. उन्होंने कहा कि ये सरकार कि जिम्मेदारी है कि लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा मिले.