नई दिल्ली. उच्च शिक्षण संस्थाओं में नियुक्तियों में आरक्षण संबंधी रोस्टर प्रणाली को लेकर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है, हमारे पास 200 प्वाइंट रोस्टर का सिस्टम है. लेकिन कोर्ट ने इसके खिलाफ आदेश दिया है और डिपार्टमेंटर रोस्टर के लिए कहा है. हम इसका समर्थन नहीं करते हैं. हमने खुद इसे लेकर एक पिटिशन फाइल की थी, जिसे डिसमिस कर दिया गया है.

जावड़ेकर ने इसके आगे कहा, हम 200 प्वाइंट रोस्टर के साथ हैं और इसे देने जा रहे हैं. सिर्फ आखिरी कैबिनेट मिटिंग का इंतजार है. इसके दो दिन बाद यूनिवर्सिटी कम्यूनिटी को न्याय मिल जाएगा. मैं इसके लिए बहुत ज्यादा आश्वस्त हूं क्योंकि मोदी सरकार सामाजिक न्याय के लिए हमेशा खड़ी रहती है.

बता दें कि सपा, बसपा, आप और राजद के सदस्य उच्च शिक्षण संस्थाओं में नियुक्तियों में आरक्षण संबंधी 13 सूत्री रोस्टर के बजाय 200 सूत्री रोस्टर को वापस लेने के लिये अध्यादेश या विधेयक लाने की मांग कर रहे हैं. इनकी दलील है कि रोस्टर प्रणाली से अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्गों का आरक्षण प्रभावित होगा. जावड़ेकर ने गुरुवार को राज्यसभा में बताया था कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले पर लागू की गयी 200 सूत्री रोस्टर प्रणाली के खिलाफ केन्द्र सरकार द्वारा उच्चतम न्यायालय में दायर विशेष अनुमति याचिका खारिज करने के बाद सरकार अब पुनर्विचार याचिका दायर करेगी.

विपक्ष ने लगाया आरोप
विपक्ष ने सरकार पर अदालत में लचर पक्ष पेश करने का आरोप लगाते हुये केंद्र से इस मामले में अध्यादेश लाने की मांग की है. जावड़ेकर ने कहा, सरकार हमेशा सामाजिक न्याय के पक्ष में है, पुनर्विचार याचिका खारिज होने की स्थिति में हम अध्यादेश या विधेयक लाने का फैसला किया है.

जावड़ेकर ने दिलाया भरोसा
जावड़ेकर ने इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया पूरा होने तक उच्च शिक्षण संस्थाओं में नियुक्ति या भर्ती प्रक्रिया बंद रहने का भी भरोसा दिलाया. इस बीच सरकार द्वारा उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका पर लचर तरीके से अपना पक्ष रखने के विपक्ष के आरोप के जवाब में जावड़ेकर ने अदालत में बहस के दस्तावेज को सदन पटल पर पेश किया.

सरकार ने कराया है अध्ययन
उन्होंने बताया कि रोस्टर प्रणाली को समग्र संस्थान के बजाय विभागीय आधार पर लागू करने से विभिन्न वर्गों के आरक्षण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव का सरकार ने अध्ययन कराया है. जावड़ेकर ने बताया, हमने नया अध्ययन किया है जिसमें लगभग 30 विश्वविद्यालयों की मौजूदा व्यवस्था का विश्लेषण कर यह जानने का प्रयास किया है कि विभागवार रोस्टर प्रणाली लागू करने पर अनुसूचित जाति एवं जनजातियों को किस प्रकार से नुकसान होगा.