एक्टर प्रकाश राज एक ऐसी शख्सियत हैं जो ऑन कैमरा और रीयल लाइफ में लोगों के बीच फेमस हैं. सोमवार को उन्होंने टाऊन हॉल में कर्नाटक दलित संघर्ष समिति द्वारा आयोजित डोमोक्रेसी डे कार्यक्रम के दौरान लोकतंत्र पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कुछ स्वार्थी लोगों के कारण मंगलूरू में सांप्रदायिक सौहार्द खराब होने से जिले पर एक कलंक लगा है.

उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म कभी किसी को नफरत करना नहीं सिखाता, लेकिन कुछ लोगों ने आज के समय में इस धर्म को नए रूप में परिभाषित किया है. राज ने यह भी कहा कि सिर्फ चंद लोगों के कारण लोकतंत्र का अस्तित्व खतरे में हैं. इसके अलावा उन्होंने कहा ”गलत के खिलाफ आवाज उठाना आज के समय में अपराध के समान हो गया है, ऐसे लोगों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है.”

प्रकाश राज यहीं नहीं नहीं रुके, उन्होंने सरकारों के काम करने के तरीके पर भी सवालिया निशान लगाए. उन्होंने कहा ”अगर इतिहास उठा के देखा जाए तो हम पाएंगें कि तानाशाहों का अंत हमेशा बुरा ही हुआ है. तानाशाह सरकार के राज करने के दौरान जनता दमन होता है. लोगों को हमेशा मूर्ख नहीं बनाया जा सकता, वो कभी न कभी अपने हक के लिए आवाज जरूर उठाएंगे.”

आलोचना के मुद्दे पर भी उन्होंने बेबाकी से अपने विचार रखे. उन्होंने कहा ”आलोचना लोकतंत्र का ही एक हिस्सा है. विपक्ष के बिना कोई भी सरकार एक स्वस्थ्य लोकतंत्र का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती.” केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े की प्रतिक्रिया पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा ”लोकतंत्र कोई साहित्य नहीं जिसे किसी पसंद और नापसंद के अनुसार बदला जा सके. लोकतंत्र पवित्र सिस्टम है जिसमें देश की जनता को एक समान अधिकार देने का प्रावधान किया गया है.”