नई दिल्लीः चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की ओर से 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए काम करने की खबरों का खंडन किया गया है. उनकी संस्था इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) ने इस बारे में आ रही खबरों को अफवाह करार दिया है. I-PAC ने कहा है कि कुछ ऐसी रिपोर्ट्स आई हैं कि प्रशांत किशोर और उनकी टीम आगामी लोकसभा चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी को रणनीति बनाने में सहयोग करेंगे, लेकिन यह रिपोर्ट गलत है. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने भाजपा के लिए काम किया था.  I-PAC के एक वरिष्ठ सदस्य और प्रशांत किशोर के करीबी सहयोगी ने हमारे सहयोगी जी न्यूज डॉट कॉम से कहा कि इस न्यूज में कोई सच्चाई नहीं है.

उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठक करते रहते हैं और ऐसी बैठकों को भाजपा के साथ जाने से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर और I-PAC पिछले चार साल से कई राजनीतिक दलों से जुड़े हुए हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव से हम भारतीय राजनीति के लिए रणनीति बनाने के काम में उतरे थे. उसके बाद प्रशांत किशोर ने 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के लिए काम किया. इन दोनों चुनाव में मोदी और नीतीश की अगुवाई में संबंधित गठबंधनों की भारी जीत हुई थी.

इसके बाद 2017 में प्रशांत किशोर की टीम ने पंजाब में कांग्रेस के लिए काम किया. वहां पर भी कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने शानदार जीत दर्ज की थी. हालांकि उत्तर प्रदेश में प्रशांत किशोर ने कांग्रेस और सपा के गठबंधन के लिए काम किया था लेकिन वहां इन दोनों पार्टियों को बुरी हार का सामना करना पड़ा. अभी I-PAC आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस के लिए काम कर रही है.

अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में किया गया था दावा
एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार पीएम नरेंद्र मोदी और प्रशांत किशोर पिछले 6 महीनों से एक दूसरे के संपर्क में हैं. खबरों के मुताबिक प्रशांत की बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से भी मुलाकात हुई हैं. फिलहाल रिपोर्ट्स बता रही हैं कि मुलाकात के बाद भी दोनों में कोई निष्कर्ष नहीं निकला है. हालांकि राजनीतिक गलियारे में यह चर्चा उठने लगी है कि प्रशांत किशोर एक बार फिर सारथी बनकर बीजेपी के रथ को दौड़ा सकते हैं. इससे पहले प्रशांत ने नरेंद्र मोदी का साथ साल 2012 गुजरात विधानसभा चुनाव और साल 2014 के लोकसभा चुनाव में दिया था. इसके बाद राज्य और केंद्र दोनों में बीजेपी की प्रचंड जीत हुई. अमित शाह से मनमुटाव होने के कारण प्रशांत ने अलग राह चुनी और बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने जेडीयू-आरजेडी-कांग्रेस के महागठबंधन का साथ दिया. इस चुनाव में बीजेपी को हार मिली थी.