अटलजी की याद में सर्वदलीय प्रार्थना सभा, जुटे सभी दलों के दिग्गज नेता

प्रार्थना सभा में पीएम नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी के तमाम नेताओं सहित दूसरे दलों के दिग्गज नेता भी जुटे.

Published date india.com Updated: August 20, 2018 8:21 PM IST
अटलजी की याद में सर्वदलीय प्रार्थना सभा, जुटे सभी दलों के दिग्गज नेता, पीएम मोदी ने ऐसे किया याद
अटलजी की याद में सर्वदलीय प्रार्थना सभा.

नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने के लिए सर्वदलीय प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया. प्रार्थना सभा में पीएम नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी के तमाम नेताओं सहित दूसरे दलों के दिग्गज नेता भी जुटे. संघ प्रमुख मोहन भागवत सहित कई हस्तियां भी प्रार्थना सभा में पहुंची.

प्रार्थना सभा में दिग्गज जुटे

प्रार्थना सभा में अटलजी की बेटी और नातिन के अलावा पीएम मोदी, लालकृष्ण आडवाणी, राजनाथ सिंह, संघ प्रमुख मोहन भागवत, कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती मौजूद थीं. इसके अलावा कई धर्मों के धर्मगुरु भी यहां मौजूद थे.

इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा, जीवन कैसा हो ये हमारे हाथ में है. जीवन कितना लंबा हो ये हमारे हाथ में नहीं है. अटलजी ने जिंदगी को जीकर दिखाया. अटलजी ने जनसामान्य के लिए जीवन खपा दिया. लंबे समय तक विपक्ष में रहकर भी लोकतंत्र के लिए समर्पित रहे. अपमान, उपहास के बावजूद देश के लिए समर्पित थे. दुनिया के लिए भारत का परमाणु परीक्षा चौंकाने वाला था. अटल निर्णय ने परमाणु परीक्षण को अंजाम दिया. बहुत देश इससे नाराज हुए और भारत पर प्रतिबंध लगाए. कई देश भारत के खिलाफ हो गए.

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पीएम ने कहा, कश्मीर पर वाजपेजी ने अलग नजरिया रखा. अटलजी ने आतंकवाद पर दुनिया का ध्यान आकर्षित किया. उनकी वजह से ही कश्मीर चर्चा से हट गया और आतंकवाद पर चर्चा होने लगी. अटलजी ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को रखा. उनके सपने को पूरा करना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

आडवाणी ने किया याद

पीएम मोदी के बाद लालकृष्ण आडवाणी ने अटलजी को याद किया. उन्होंने कहा- आज ऐसी सभा को संबोधित करूंगा, ऐसी कभी कल्पना नहीं की थी. मुझे इसका पहला पहली लक्षण तो यही ख्याल में आता है कि कोई ऐसी सभी जिसमें अटलजी उपस्थित ना हो, नहीं सोचा था कि ऐसी सभा संबोधित करने पड़ेगी. अटलजी कहते थे कभी कभी कि मैं कितने दिन रहूंगा, तब मन में एक तकलीफ होती थी. मैंने जब अपने जीवन की पुस्तक लिखी थी, उसमें अटलजी का जिक्र था. इसीलिए जब उसका विमोचन हुआ और उसमें अटलजी नहीं आए तो मुझे बहुत कष्ट हुआ. मैं उसका जिक्र करता था कि पुस्तक लिखी, विमोचन हुआ, लेकिन जब विमोचन हुआ तो अटलजी उपस्थित नहीं थे. आज भी वह उपस्थित नहींं हैं. आज की सभा में अटलजी को जानने वाले, काम करने वाले कार्यकर्ता नहीं है. लेकिन कई दलों के नेता मौजूद हैं जिनका जनसंघ या बीजेपी से संबंध नहीं ंहै. वह भी यहां उपस्थित हैं, इसका मुझे बहुत आनंद है.

मेरी मित्रता अटलजी से 65 सालों से रही. हम साथ साथ घूमते थे, पुस्तकें साथ साथ पढ़ते थे. कभी कोई अटलजी के परिचय का कोई साक्षात्कार करेगा तो जानेगा कि वह भोजन अच्छा बनाते थे. उनके साथ साथ रहते हुए मुझे इसका बहुत अनुभव हुआ. अटलजी कई बार भोजन पकाकर खिलाते थे. चाहे वह खिचड़ी ही सही. इसका जिक्र इसलिए कर रहा हूं कि एक दिन मैंने अपनी किताब लिखी, मैंने सार्वजनिक रूप से विमोचन किया और अटलजी उसमें नहीं आए तो मुझे बहुत दुख हुआ. आज भी अटलजी की अनुपस्थिति में बोल रहा हूं तो बहुत दुख होता है.

मैंने अटलजी से बहुत सीखा है. अटलजी को नजदीक से देखने का मौका मिला. उनसे बहुत कुछ पाया. इसीलिए दुख होता है कि वह हमसे अलग हो गए. इतना ही कह सकता हूं कि अटलजी ने जो कुछ हमें सिखाया, बताया, उसे जीवन में उतारकर दिखाएं. हमने जो संस्कार आरएसएस से पाए हैं, उन संस्कारों को कार्यान्वित करने का सौभाग्य होगा. मैं उनके बताए मार्ग पर जीवन पर चल पाऊं. सब साथियों को वहीं दे पाने में समर्थ हो पाऊं, यहीं शक्ति भगवान मुझे दे.

मोहन भागवत ने किया याद

इस मौके पर भागवत ने कहा- अटलजी ने विपरीत हालातों में किया. मै अटलजी के साथ कभी नहीं रहा. जब कॉलेज में था तब उन्हें देखने का मौका मिला था. उनका भाषण सुनने हम सभी जाया करते थे. राजनीति में रहते हुए भी सबके प्रति सदभाव था.

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