नई दिल्ली: 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुकाबला कर सकती है? इस तरह की अटकलबाजी पर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर का कहना है कि यह कहना जल्दबाजी होगी. उन्होंने कहा कि प्रियंका को कुछ साल का समय दिया जाना चाहिए. इसके बाद देश के लोग फैसला करेंगे कि वह जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार है कि नहीं. प्रशांत किशोर मीडिया की उन खबरों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जिसमें कहा जा रहा है कि प्रियंका गांधी वाड्रा की ऐसे समय में कांग्रेस में एंट्री हुई है कि वह लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवार हो सकती हैं.

वर्षों की अटकलों पर विराम लगाते हुए प्रियंका गांधी वाड्रा बुधवार को औपचारिक रूप से राजनीति में उतरीं और पार्टी ने उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए महासचिव नियुक्त किया. इस कदम को आम चुनाव से पहले राज्य में पार्टी के पूरी तरह कमर कस लेने का संकेत माना जा रहा है. प्रियंका गांधी की राजनीति में एंट्री को प्रशांत किशोर ने ‘भारतीय राजनीति में बहुप्रतीक्षित पदार्पणों में से एक’ बताया था. किशोर ने ट्वीट किया, ‘भारतीय राजनीति में बहुप्रतीक्षित पदार्पणों में से एक आखिरकार अब आया है. भले ही लोग इसके समय, उनकी ठीक-ठीक भूमिका और स्थिति पर बहस करें लेकिन मेरे लिए असल खबर यह है कि उन्होंने आखिरकर राजनीति में उतरने का फैसला किया. प्रियंका गांधी को बधाई और शुभकामनाएं.’

किशोर ने जदयू में शामिल होने से पहले उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार के तौर पर काम किया था. एएनआई को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में प्रशांत किशोर ने कहा, अगर हम सोचते हैं कि कोई व्यक्ति चाहे वह प्रियंका गांधी हों या कोई और एक सीमित समय में कांग्रेस जैसी पुरानी पार्टी में कोई बड़ा बदलाव ला देगा तो यह ठीक नहीं होगा. प्रियंका गांधी वाड्रा को दो से तीन साल का समय दिया जाना चाहिए इसके बाद देश के लोग तय करेंगे कि वह जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार हैं कि नहीं.

एएनआई से उन्होंने कहा कि ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर प्रियंका को सक्रिय राजनीति में लाया गया है. बहुत लोगों को लगता है कि उनके आने से बहुत बड़ा प्रभाव पड़ेगा. यह पूछने पर की क्या भाई-बहन पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी पर भारी पड़ेंगे? किशोर ने कहा कि दोनों नेता लंबे समय राजनीति में हैं और बीजेपी इस समय सत्ता में है. एक लंबे समय से राजनीति कर रहे नेता और एक दिन पहले ही सक्रिय राजनीति में एंट्री करने वाली नेता की तुलना करना ठीक नहीं होगा.

प्रियंका गांधी वाड्रा की इस नियुक्ति को मास्टरस्ट्रोक के तौर पर देखा जा रहा है जिससे उत्तर प्रदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा होगा जहां कांग्रेस का प्रभाव पिछले कई सालों के दौरान घटता जा रहा है और समाजवादी पार्टी (सपा) एवं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने गठबंधन करने की घोषणा की है. प्रियंका गांधी वाड्रा (47) हिंदी पट्टी उत्तर प्रदेश में अपने भाई कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मदद करेंगी, जहां लोकसभा की सर्वाधिक 80 सीटें हैं.