गुवाहाटी: देश के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने रविवार को कहा कि मौजूदा वक्त में कुछ लोगों और समूहों का ‘आक्रामक और लापरवाही भरा बर्ताव’ देखने को मिल रहा है. हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के घटनाक्रम महज अपवाद हैं और देश की विधिक संस्थाओं की मजबूत परंपराओं से परास्त होंगे.

गोगोई ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के ऑडिटोरियम की यहां आधारशिला रखने के बाद कहा, मुझे उम्मीद है कि इस तरह की घटनाएं अपवाद होंगी और हमारी संस्था की मजबूत परंपराएं और लोकाचार इस तरह के हठी घटकों के आक्रामक बर्ताव से उबरने में हमारे हितधारकों की सदैव मदद करेंगे.

सीजेआई ने कहा कि सरकारी कार्यालयों या प्रतिष्ठानों के विपरीत, अदालतें इसलिए अद्वितीय हैं, क्योंकि न्याय के पहिये को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिदिन कई हितधारक जुटते हैं, भले ही वे एक भी आदेश से बाध्य नहीं हों. उन्होंने कहा, “आज, मैं यह कहने के लिए मजबूर हूं कि न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों को इस बात को अवश्य याद रखना चाहिए कि जनता के जिस विश्वास और भरोसे पर हमारी संस्था का अस्तित्व है, वह हमारे आदेशों और फैसलों के आधार पर बना है. सीजेआई ने यह भी कहा कि न्यायिक पदाधिकारी के रूप में चयनित होना इस प्रतिष्ठित संस्था की सेवा करने का एक अवसर है, जिसका मूल्य हमेशा कल्पना से काफी अधिक है.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि देश की अदालतों में एक हजार से अधिक मामले 50 साल से लंबित हैं। इसके साथ ही दो लाख से अधिक ऐसे मामले हैं जो 25 साल से लंबित हैं. गोगोई ने कहा कि भारत में एक हजार से अधिक मामले 50 साल से और दो लाख से अधिक मामले 25 साल से लंबित हैं. गोगोई ने यह भी कहा कि करीब 90 लाख लंबित दीवानी मामलों में से 20 लाख से अधिक ऐेसे मामले हैं, जिनमें अभी तक सम्मन तक तामील नहीं हुआ है.