President Of India Ramnath Kovind: देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रविवार सुबह अपने गांव परौंख पहुंचे. राष्ट्रपति हैलीपैड से जैसे ही अपने गांव के पास उतरे. यहां उतरते ही सबसे पहले उन्होंने झुककर अपनी मातृभूमि की मिट्टी को माथे से लगाया और नमन किया. यह बिल्कुल भावुक कर देने वाला पल था. बता दें कि राष्ट्रपति बनने के लगभग चार साल बाद रामनाथ कोविंद रविवार को पहली बार अपने पैतृक गांव परौंख पहुंचे हैं. राष्ट्रपति के साथ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी इस मौके पर मौजूद रहीं.Also Read - कम हुई भक्तों की तादाद तो पड़ोसी का बच्चा उठा लाया तांत्रिक, फिर मासूम के साथ जो किया अंदर तक हिल जाएंगे

गांव पहुंचकर उन्होंने पत्नी सविता के साथ पथरी देवी मंदिर के दर्शन किए और लगभग 15 मिनट तक विधि-विधान से पूजा की. मंदिर के पुजारी कृष्ण कुमार बाजपेई ने पूजा संपन्न कराई. Also Read - राष्ट्रपति चुनाव में समर्थन को लेकर हेमंत सोरेन ने दिया संकेत, पर दुविधा बरकरार

रामनाथ कोविंद ने कहा-कभी नहीं सोचा था राष्ट्रपति बनूंगा
कानपुर देहात के अभिनंदन समारोह में राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, ‘मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरे जैसे गांव के एक साधारण लड़के को देश के सर्वोच्च पद की जिम्मेदारी निभाने का सौभाग्य मिलेगा. लेकिन हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था ने इसे संभव बना दिया है. मैं आज जहां तक पहुंचा हूं, इसका श्रेय इस गांव की मिट्टी और आप सभी के प्यार और आशीर्वाद को को जाता है.’ Also Read - यूपी उपचुनाव के नतीजों पर सीएम योगी गदगद, कहा- '2024 के आम चुनावों को लेकर एक आशावादी संदेश'

राष्ट्रपति ने अपने बचपन को किया याद
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपने गांव पहुंचकर भावुक हो गए और अपने बचपन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि गांव की इस मिट्टी और यहां के लोगों के आशीर्वाद से वह राष्ट्रपति भवन तक पहुंचे हैं. उन्होंने बताया कि मातृभूमि को एक बार फि से नमन करने की उनको बहुत लालसा थी. राष्ट्रपति ने प्रार्थना की कि इस बार गांव आने में जितना विलंब हुआ आगे नहीं हो, फिर जल्दी गांव आने का मौका मिले.

बचपन के पलों को याद कर कहा-जहां आप हैं, वहीं मैं भी हूं
उन्होंने गांववासियों से कहा कि जहां आप हैं वहीं मैं भी हूं, आप नागरिक और मैं सिर्फ राष्ट्रपति होने के नाते प्रथम नागरिक कहलाता हूं.
राष्ट्रपति ने बचपन के साथियों की याद कर कहा कि जसवंत, विजयपाल, हरिराम, चंद्रभान के साथ पढ़ाई लिखाई की शुरुआत की. उनका मेरे जीवन में विशेष स्थान है. उन्होंने बताया कि उनके अंदर राजनीतिक चेतना बजरंग सिंह ने भरी. राम मनोहर लोहिया को गांव में लाने का श्रेय उन्हें जाता है.

गांव वालों को राष्ट्रपति भवन दिखाने की बात कही

ग्रामीण रहे दोस्त जगदीश सिंह, कैलाशनाथ बाजपाई, मोती शुक्ला, भोले सिंह ने हमेशा उनको गांव से जोड़कर रखा. राष्ट्रपति ने बताया कि अपने जीवन के 15 साल गांव में बिताए. जन्मभूमि का गौरव स्वर्ग से ज्यादा होता है. राष्ट्रपति भवन में भी गांव की याद आती है. वह भवन केवल राष्ट्रपति का नहीं देश के हर वासी को वहां आने का अधिकार है. उन्होंने गांव वालों से कहा कि दिल्ली आएं तो में यह कोशिश करूंगा की आप सब उसे देखें. उन्होंने अगले वर्ष के फिर आने का वायदा किया.