President Of Nri Green Society Reached The Feet Of Premananda Maharaj Bowed His Head And Apologized Watch Video
प्रेमानंद महाराज के चरणों में पहुंचे NRI ग्रीन सोसायटी के अध्यक्ष, झुकाया सिर, मांगी माफी | देखें वीडियो
वृंदावन में प्रेमानंद महाराज और NRI ग्रीन सोसायटी के बीच चला आ रहा विवाद आखिरकार खत्म हो गया. सोसायटी के अध्यक्ष प्रेमानंद महाराज के चरणों में पहुंचे, माफी मांगी और पदयात्रा फिर से शुरू करने की अपील की.
वृंदावन में प्रेमानंद महाराज और एनआरआई ग्रीन सोसायटी के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद आखिरकार समाप्त हो गया है. इस सकारात्मक मोड़ से एक बार फिर प्रेमानंद महाराज की रात्रि पदयात्रा शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है. एनआरआई ग्रीन सोसायटी के सदस्यों ने महाराज से मिलकर पदयात्रा फिर से शुरू करने का निवेदन किया, जिसे महाराज ने सहर्ष स्वीकार कर लिया.
प्रेसीडेंट ने मांगी माफी
एनआरआई ग्रीन सोसायटी के प्रेसीडेंट आशु शर्मा खुद प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचे और उनके चरणों में शीश नवाकर माफी मांगी. उन्होंने कहा कि सोसायटी के लोगों को अपनी गलती का अहसास हो गया है, लेकिन वे खुद महाराज के सामने आकर माफी मांगने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे. आशु शर्मा ने महाराज से निवेदन किया कि पदयात्रा फिर से शुरू होनी चाहिए, क्योंकि सोसायटी के लोग अब कोई विरोध नहीं करेंगे.
प्रेमानंद महाराज ने आशु शर्मा की माफी को सहजता से स्वीकार किया और कहा कि उनका कोई विरोधी नहीं है. उन्होंने बताया कि जब उन्हें यह आभास हुआ कि उनकी पदयात्रा से सोसायटी के लोगों को कष्ट हो रहा है, तो उन्होंने तुरंत यात्रा का मार्ग बदल दिया. महाराज ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल सबको सुख देना है, न कि किसी को दुःख पहुंचाना. उन्होंने सोसायटी के लोगों से आने का आग्रह करते हुए कहा कि उनके दिलों में सबके लिए प्रेम और सम्मान है.
ब्रजवासियों के प्रति आदर
बातचीत के दौरान आशु शर्मा ने बताया कि जब महाराज 10 साल पहले परिक्रमा करते थे, तब वे रोज उनके दर्शन के लिए आते थे. लेकिन भीड़ बढ़ने के कारण अब उन्होंने आना कम कर दिया ताकि अन्य श्रद्धालु भी दर्शन कर सकें. उन्होंने कहा कि कुछ यूट्यूबर प्रसिद्धि पाने के लिए सोसायटी के लोगों को भड़काने का प्रयास कर रहे थे, जबकि एक सच्चा ब्रजवासी महाराज के खिलाफ कभी नहीं जा सकता. इस पर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि ब्रजवासी उनके आराध्य हैं और वे भोले-भाले तथा सरल हृदय के होते हैं. इस संवाद के साथ ही विवाद का सुखद अंत हो गया.
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