नई दिल्ली| राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आज वायुसेना के गरूड़ कमांडो कार्पोरल ज्योति प्रकाश निराला को देश में शांतिकाल का सर्वोच्च सैन्य सम्मान अशोक चक्र, मरणोपरांत देने के बाद भावुक हो गए. कार्पोरल निराला ने जम्मू कश्मीर के बांदीपोरा में दो आतंकवादियों को धराशायी करने के बाद अपने प्राणों को बलिदान कर दिया था. Also Read - राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 2021 के लिए पल्स पोलियो कार्यक्रम का किया शुभारंभ,17 करोड़ बच्चों को दी जाएगी दवा

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कार्पोरल निराला की पत्नी सुषमानंद एवं उनकी मां मालती देवी को गणतंत्र दिवस परेड में पुरस्कार देने के बाद राष्ट्रपति रूमाल से अपना चेहरा एवं आंखें पोंछते नजर आए. कार्पोरल निराला भारतीय वायु सेना के गरूड़ विशेष बल इकाई के अंग थे. इसका एक हिस्सा रक्षक आपरेशन के दौरान राष्ट्रीय राइफल्स की बटालियन से जुड़ा था. Also Read - 72nd Republic Day: गणतन्त्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति ने दिया देश के नाम संबोधन, भारतीय सेना को किया सलाम; चीन पर साधा निशाना

निराला ने खुद को आतंकियों के ठिकाने के पास छिपाया था

भारतीय वायुसेना के विशेष बल के कमांडो ने जम्मू एवं कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ाई के दौरान अदम्य साहस और शौर्य का परिचय देते हुए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया था. निराला 18 नवंबर 2017 को बांदीपोरा जिले के चंदरनगर गांव में गरुड़ की टुकड़ी और राष्ट्रीय राइफल द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किए गए एक आक्रामक अभियान का हिस्सा थे.

गरुड़ की टुकड़ी ने जिस घर में आतंकवादी छिपे हुए थे, वहां चारों ओर से घात लगाया. निराला ने खुद को आतंकवादियों के ठिकाने के पास रखा, ताकि आतंकवादी बच कर नहीं निकल पाए.

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जब सैन्य टुकड़ी आतंकवादियों के बाहर निकलने का इंतजार कर रही थी, तभी छह आतंकवादी बाहर भागते हुए आए और सैनिकों पर उन्होंने अंधाधुंध गोलियां बरसाई और हथगोले फेंकना शुरू कर दिए.

लश्कर-ए-तैयबा के दो आंतकियों को मार गिराया

निराला ने लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादियों को मार गिराया और दो को घायल कर दिया. मुठभेड़ के दौरान वह भी गोली लगने से घायल हुए. गंभीर रूप जख्मी होने के बावजूद निराला ने गोलीबारी करनी जारी रखी और बाद में उनकी गोलियों के घाव के कारण जान चली गई. इस दौरान सभी छह आतंकवादी मारे गए.