नई दिल्ली: राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है. केंद्र सरकार ने सोमवार की शाम इस संबंध में अधिसूचना जारी की. गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है, “भारत के संविधान के अनुच्छेद 80 के खंड (तीन) के साथ पठित खंड (एक) के उपखंड (क) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए राष्ट्रपति, एक मनोनीत सदस्य की सेवानिवृत्ति के कारण हुई रिक्ति को भरने के लिए रंजन गोगोई को राज्यसभा का सदस्य मनोनीत करते हैं.” Also Read - राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद भी कराएंगे कोरोना टेस्ट, सिंगर कनिका से जुड़ा है मामला

बता दें कि पूर्व जस्टिस रंजन गोगोई ने अक्टूबर 2018 में देश के 46वें मुख्‍य न्‍यायाधीश पद की शपथ ली थी. जस्टिस गोगोई इस पद पर पहुंचने वाले पूर्वोत्‍तर भारत के पहले मुख्‍य न्‍यायधीश बने थे. Also Read - जेएनयू का चरित्र बदलने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे: केंद्र सरकार

वे पिछले साल 17 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश के पद से रिटायर हुए थे. बता दें कि चीफ जस्टिस गोगोई ने 9 नवंबर 2019 को दशकों पुराने राम मंदिर विवाद पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. उन्होंने राम मंदिर के पक्ष में अपना निर्णय दिया और इसके निर्माण के लिए सरकार को तीन महीने के अंदर ट्रस्ट बनाकर प्रारूप रेखा तैयार करने के भी आदेश दिए थे.

रंजन गोगोई 2012 से सुप्रीम कोर्ट में जज रहे और अपने इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने ऐसे बहुत से फैसले दिए जिनके लिए उन्हें याद रखा जाएगा. रंजन गोगोई को अयोध्या सहित जम्मू- कश्मीर और एनआरसी जैसे मामलों से जुड़े फैसले के लिए जाना जाता है. अपने अंतिम कामकाजी दिन से दो दिन पहले एक और बड़ा फैसला सुनाया था जिसमें उन्होंने कहा कि मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय भी आरटीआई (RTI) के दायरे में आएगा.

जस्टिस गोगोई का जन्म 18 नवंबर 1954 को असम के डिब्रूगढ़ में हुआ था. उनकी शुरुआती शिक्षा डॉन वास्‍को स्‍कूल में हुई थी. इंटरमीडिएट की पढ़ाई काटेन कॉलेज गुवाहटी से हुई थी. दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय के सेंट स्‍टीफन कॉलेज से इतिहास में स्‍नातक की शिक्षा पूरी की थी. इसके बाद डीयू से कानून की डिग्री हासिल की थी. 1978 में गुवाहाटी हाईकोर्ट में बतौर वकील करियर की शुरुआत की थी. 28 फरवरी 2001 को गुवाहटी हाईकोर्ट का जज बनाया गया था.

इसके बाद 9 सितंबर 2010 को उनका तबादला पंजाब एवं हरियाणा होईकोर्ट में हो गया था. 12 फरवरी 2011 को वह पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश के रूप में नियुक्ति हुए थे. इस पद पर वह करीब एक साल तक रहे और 23 अप्रैल 2012 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे.