नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने कार्यकाल में पहली दया याचिका खारिज की है. राष्ट्रपति ने हत्या के आरोपी जगत राय की दया याचिका खारिज की जिसकी मौत की सजा सुप्रीम कोर्ट ने 5 साल पहले बरकरार रखने का फैसला सुनाया था. रामनाथ कोविंद के कार्यकाल की ये पहली दया याचिका थी जिस पर उन्होंने अपना फैसला सुनाया.

1 जनवरी 2006 का मामला

बताया जाता है कि इस पर विशेषज्ञों के साथ उनकी चर्चा 10 महीने तक चली. इत्तेफाक से दया याचिका का ये केस उसी बिहार से है जहां रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति बनने से पहले गवर्नर रहे. जगत राय ने अपने साथियों के साथ पांच बच्चों और उनकी मां की जिंदा जलाकर हत्या कर दी थी. घटना बिहार के वैशाली जिले के रामपुर श्यामचंद गांव की है जब 1 जनवरी 2006 को जगत राय ने रात को विजेंद्र महतो के घर में आग लगा दी जिसमें उसके 5 बच्चे और पत्नी की जलकर दर्दनाक मौत हो गई.

सितंबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर मामला मानते हुए जगत को मिली मौत की सजा बरकरार रखी. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने बताया कि जगत राय की दया याचिका पिछले साल तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भेजी गई थी लेकिन 14वें राष्ट्रपति के चुनाव संबंधी प्रक्रिया के चलते वह निर्णय नहीं ले सके थे.

हालांकि, प्रणब मुखर्जी ने अपने कार्यकाल में जुलाई 2017 तक 34 दया याचिकाओं पर सुनवाई की और इनमें से 30 को खारिज कर दिया जबकि 4 केसों में माफी दे दी. अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रपति कोविंद ने जगत राय के मामले में कानूनी राय लेते हुए गृह मंत्रालय से बात की जिसके बाद याचिका खारिज की गई.

ये था मामला
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, विजेंद्र महतो ने जगत राय, वजीर राय और अजय राय पर अपनी भैंस चुराने का आरोप लगाया था जिसकी उसे भयंकर कीमत चुकानी पड़ी. ये लोग विजेंद्र से पुलिस केस वापस लेने की मांग करते रहे और इनकार करने पर ऐसा बदला लिया. 1 जनवरी 2006 की रात जब विजेंद्र की पत्नी बेबी देवी, बेटे सूरज, अनिल, राजेश और बेटियां पूनम और नीलम सोए हुए थे, जगत राय को घर को आग लगा दी. विजेंद्र किसी तरह बच निकला था और बाकी सभी की मौत हो गई. हालांकि बाद में विजेंद्र ने भी अस्पताल में दम तोड़ दिया था.