नई दिल्ली: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि राजग सरकार द्वारा तय किए गए राफेल लड़ाकू विमान सौदे में ‘उड़ान भरने लायक विमान’ की कीमत संप्रग द्वारा तय किए गए सौदे के बराबर ही थी. रिपोर्ट में बताया गया कि सौदे के 11 बिंदुओं में चार बिंदुओं के तहत तय की गई कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ. इन चार बिंदुओं में उड़ान के लिए तैयार विमान, सिम्युलेटर प्रशिक्षण उपकरणों एवं वार्षिक रख-रखाव जैसे विषय शामिल थे. इससे पहले मीडिया में आई खबरों में दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रेपियर ने दावा किया था कि उड़ान के मूल रूप (बिना उपकरणों के साथ) की कीमत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार द्वारा तय किए गए सौदे के मुकाबले नये सौदे में ज्यादा सस्ती है.

राफेल पर कैग रिपोर्ट: जेटली बोले-‘महाझूठबंधन’ का झूठ बेनकाब हो गया

कैग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारतीय वायु सेना ने नये सौदे के तहत राफेल विमान में भारत के नजरिए से हो रहे संवर्द्धन (आईएसई) को घटाने का प्रस्ताव दिया था लेकिन रक्षा मंत्रालय ने इसे खारिज कर दिया. साथ ही कैग ने इस ओर भी इशारा किया कि नये सौदे में भारत के लिहाज से किए गए चार संवर्द्धनों की “जरूरत नहीं थी.” कैग ने देखा कि 2015 में 36 विमानों पर बातचीत के दौरान डिप्युटी चीफ ऑफ एअर स्टाफ (डीसीएएस) की अध्यक्षता में भारतीय वार्ता दल ने आईएसई की संख्या घटाने का प्रस्ताव दिया था. यह प्रस्ताव “ज्यादा कीमत एवं विमानों की कम संख्या” को देखते हुए दिया गया था.

राफेल सौदे पर आगे बढ़ी मोदी सरकार, फ्रांस को किया 25 फीसदी राशि का पेमेंट

लेकिन दसॉल्ट एविएशन ने कहा था कि उसकी कीमतें एक संपूर्ण पैकेज है इसलिए रक्षा मंत्रालय को मामले को फ्रांस सरकार के समक्ष उठाना होगा. हालांकि रक्षा मंत्रालय ने डीसीएस के इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था क्योंकि वह एअर स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वॉयरमेंट्स को कमजोर करने के समान होता.