नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 42वीं बार मन की बात की. इस दौरान उन्होंने रामनवमी की शुभकामनाओं के साथ अपनी बात शुरू की. उन्होंने कहा, पूरी दुनिया में राम और रामायण का प्रभाव है. मोदी ने कहा, राम और रामायण न सिर्फ भारत, बल्कि आसियान देशों में, आज भी उतनी ही प्रेरणा और प्रभाव पैदा कर रहे हैं. गांधी जी की जिंदगी में राम नाम की शक्ति थी.

बच्चों ने लिखी चिट्ठी
पीएम ने कहा, बहुत सारे बच्चों ने ‘एग्जाम वॉरियर’ पुस्तक के पीछे जो ग्रेटिट्यूड कार्ड्स दिए हैं. उन पर अपने दिल से जो विचार लिखे हैं. इन पत्रों से मेरी दिनभर की थकान छू-मंतर हो जाती है. उन्होंने कहा, पिछले दिनों फ्रांस के राष्ट्रपति काशी की यात्रा पर गए थे. वाराणसी के श्रीमान प्रशांत कुमार ने लिखा है कि उस यात्रा के सारे दृश्य, मन को छूने वाले थे. प्रभाव पैदा करने वाले थे.

हेल्थ को लेकर करूं बात
मैंने सोचा इस बार हेल्थ को लेकर विस्तार से बात करूं. फिट इंडिया की बात करूं. आप सब नौजवान मिलकर फिट इंडिया का मूवमेंट भी चला सकते हैं. योगेश भद्रेशा जी का कहना है कि इस बार युवाओं से स्वास्थ्य की बात करूं. उन्हें लगता है कि एशियाई देशों की तुलना में हमारे युवा फिजिकली कमजोर हैं.

किसानों की भी चिट्ठी आई
पीएम ने कहा, किसान मेलों औ रखेती को लेकर जो गतिविधियां देश-भर में चल रही हैं, उसके बारे में किसान भाई-बहनों के पत्र आए हैं. वाटर कंजर्वेशन को लेकर कुछ सक्रिय नागरिकों ने सुझाव भेजे हैं. असम के करीमगंज के एक रिक्शा-चालक अहमद अली ने अपनी इच्छाशक्ति के बल पर गरीब बच्चों के लिए नौ स्कूल बनवाए हैं. इससे देश की अदम्य इच्छाशक्ति के दर्शन होते हैं.

कोलकाता के सैदुल का किया जिक्र
पीएम ने कोलकाता के सैदुल का जिक्र करते हुए कहा, 13 साल पहले समय पर इलाज नहीं होने के कारण कैब चालक सैदुल लस्कर की बहन का देहांत हो गया था. इसके बाद उन्होंने अस्पताल बनाने की ठान ली, जिससे इलाज के अभाव में किसी की मौत न हो. इसके लिए उन्होंने घर के गहने बेचे और दान के जरिए रुपये इकट्ठे किए. उनकी कैब में सफर करने वाले कई यात्रियों ने दिल खोलकर दान किया. इस तरह से रुपये जुटाकर 12 साल में सैदुल ने कोलकाता के पास पुनरी गांव में 30 बेड का अस्पताल तैयार करवाया. यह है न्यू इंडिया की ताकत.

कानपुर के मोहन चौधरी का किया जिक्र
आगे उन्होंने कहा कि कानपुर के डॉक्टर अजी मोहन चौधरी की कहानी सुनने को मिली कि वह फुटपाथ पर जाकर गरीबों को देखते हैं और उन्हें मुफ्त में दवाइयां देते हैं. इससे देश के बंधु-भाव को महसूस करने का अवसर मिला. उत्तरप्रदेश की एक महिला अनेकों संघर्ष के बावजूद 125 शौचालयों का निर्माण करती है और महिलाओं को उनके हक के लिए प्रेरित करती है. तब मातृ-शक्ति के दर्शन होते हैं. आज पूरे विश्व में भारत की ओर देखने का नजरिया बदला है. आज जब, भारत का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है तो इसके पीछे मां-भारती के इन बेटे-बेटियों का पुरुषार्थ छुपा हुआ है.

डीडी किसान की उपयोगिता बताई
उन्होंने कहा, इस बार मैंने डीडी किसान चैनल पर (जो किसानों के साथ चर्चाएं होती हैं) उनके वीडियो देखे. मुझे लगता है कि हर किसान को डीडी किसान चैनल देखना चाहिए. उन प्रयोगों को अपने खेत में लागू करना चाहिए. महात्मा गांधी, शास्त्री जी, लोहिया जी, चौधरी चरण सिंह जी, चौधरी देवीलाल जी, सभी ने कृषि और किसान को देश की अर्थव्यवस्था और आम जन-जीवन का एक अहम अंग माना है. मिट्टी, खेत-खलिहान और किसान से महात्मा गांधी को कितना लगाव था, ये भाव उनकी इस पंक्ति में झलकता है-‘To forget how to dig the earth and to tend the soil, is to forget ourselves.’ यानी, धरती को खोदना और मिट्टी का ख्याल रखना अगर हम भूल जाते हैं, तो ये स्वयं को भूलने जैसा है.