नई दिल्ली. यहां प्रवासी भारतीय केंद्र में एक सम्मान समारोह में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ’ का पुरस्कार दिया. उन्हें ये पुरस्कार ‘पॉलिसी लीडरशिप’ के कैटेगरी में दिया गया है. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, देश के किसानों के लिए मिट्टी प्राण से प्यारी है. प्रकृति के लिए हमें बहुत कुच करना है. यह पौधे में परमात्मा का रूप देखने वालों का सम्मान. मुझे मिला सम्मान भारत के करोड़ों लोगों का सम्मान है. साथ ही
प्रृथ्वी पर्यावरण की रक्षा करने वाले अनाम लोगों को मिला ये सम्मान है.

प्रधानमंत्री ने कहा, क्लाइमेट और कैलामिटी का संबंध सीधा कल्चर से है. ऐसे में हमें क्लाइमेट जस्टिस को सुनिश्चित करना होगा. हम पेड़ पौधे की पूजा करते हैं और मौसम को त्योहार की तरह मनाते हैं, इसलिए ये सुनिश्चित करना हमारे लिए आसान है. प्रकृति पर ज्यादा दबाव नहीं डाल सकते. उन्होंने कहा, देश तेजी से विकास करना चाहता है. हमारा किसी से मुकाबला नहीं है, लेकिन प्रकृति के लिए हमें बहुत कुछ करना है.

ये संकल्प
पीएम ने साल 2022 तक एक बार इस्तेमाल किए जाने वाले प्लास्टिक से मुक्ति का संकल्प लिया है. घर, गली, मेट्रो से लेकर एयरपोर्ट तक पानी बचाना है. एलईडी बल्ब से रेन वाटर हार्वेस्टिंग तक को बढ़ावा दिया जा रहा है. पर ड्रोप, मोर क्रॉप हमारा लक्ष्य है.

मेक्रों और मोदी को सम्मान
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के नेतृत्व और 2022 तक भारत को एकल इस्तेमाल वाले प्लास्टिक से मुक्त कराने के संकल्प को लेकर संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया है. यह सम्मान पांच अन्य व्यक्तियों और संगठनों को भी दिया गया है. नीतिगत नेतृत्व की श्रेणी में फ्रेंच राष्ट्रपति एमैनुअल मैक्रों और मोदी को संयुक्त रूप से इस सम्मान के लिए चुना गया है.

सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान
दुनिया के छह सबसे उत्कृष्ट पर्यावरण परिवर्तकों को संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान ‘‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवार्ड’’ से सम्मानित किया गया है. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के मुताबिक, ‘इस साल के पुरस्कार विजेताओं को आज के समय के कुछ बेहद अत्यावश्यक पर्यावरणीय मुद्दों से निपटने के लिये साहसी, नवोन्मेष और अथक प्रयास करने के लिये सम्मानित किया जा रहा है.