नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद के बजट सत्र के लिए सरकार का विधायी एजेंडा प्रस्तुत करने को लेकर शनिवार को एक सर्वलीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे. इस बार यह परंपरागत सर्वदलीय बैठक सत्र शुरू होने के बाद आयोजित की जा रही है. दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के साथ संसद का बजट सत्र शुक्रवार को शुरू हुआ.Also Read - क्वाड से बौखलाए चीन का War Plan लीक, चीन को चारों ओर से घेरेंगी Quad Countries | Watch Video  

आमतौर पर इस तरह की सभी बैठकें संसद के सत्र से पहले होती हैं, ताकि दोनों सदनों की कार्यवाही सुगमता से हो सके. इस वर्चुअल बैठक के दौरान, विपक्षी दलों द्वारा किसान आंदोलन पर चर्चा कराने की मांग किए जाने की संभावना है. दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर पिछले दो महीनों से प्रदर्शनकारी किसान केंद्र के तीन नये कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग करते हुए डटे हुए हैं. Also Read - पीएम नरेंद्र मोदी की इस तस्वीर ने मचाया सोशल मीडिया पर तहलका, लोग बोले- प्रधानसेवक, राह दिखाते हैं

हालांकि, विपक्षी दलों ने शुक्रवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा बुलाई गई एक सर्वदलीय बैठक में इसी तरह की मांग की, लेकिन सरकार ने सुझाव दिया कि किसान आंदोलन का मुद्दा राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उठाया जा सकता है, जिसके लिए लोकसभा में दो, तीन और चार फरवरी को 10 घंटे का समय आवंटित किया गया है. Also Read - Quad Leaders Summit 2022: क्वाड सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध पर जताई गई चिंता, पीएम मोदी-जो बाइडेन ने कहीं ये बड़ी बातें...जानिए

राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान कांग्रेस के लोकसभा सदस्य रवनीत सिंह बिट्टू केंद्रीय कक्ष में पहुंचे और उन्होंने विवादों में घिरे तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ नारेबाजी की. उल्लेखनीय है कि किसानों के आंदोलन के मुद्दे को लेकर कांग्रेस समेत 20 से अधिक पार्टियों ने राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार किया था.

कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, नेशनल कांफ्रेंस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, सपा, राजद, माकपा, भाकपा, आईयूएमएल, आरएसपी, पीडीपी, एमडीएमके, केरल कांग्रेस(एम) और एआईयूडीएफ ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति अभिभाषण के बहिष्कार का फैसला संयुक्त रूप से किया था. बाद में आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल, जनता दल (एस) और बसपा ने भी दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया.

राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा उनके मंत्रिमंडल के विभिन्न सदस्य, जद(यू), अन्नाद्रमुक और बीजू जनता के सदस्य भी मौजूद थे. अपने करीब एक घंटे के अभिभाषण में कोविंद ने अर्थव्यवस्था के विषय पर कहा कि महामारी से प्रभावित हुई अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर लौटने लगी है.

कृषि कानूनों का उल्लेख करते हुए कोविंद ने कहा, ‘‘व्यापक विमर्श के बाद संसद ने सात महीने पूर्व तीन महत्वपूर्ण कृषि सुधार, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, कृषि (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक, और आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक पारित किए हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘इन कृषि सुधारों का सबसे बड़ा लाभ भी 10 करोड़ से अधिक छोटे किसानों को तुरंत मिलना शुरू हुआ. छोटे किसानों को होने वाले इन लाभों को समझते हुए ही अनेक राजनीतिक दलों ने समय-समय पर इन सुधारों को अपना भरपूर समर्थन दिया था.’’

राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया, ‘‘वर्तमान में इन कानूनों के क्रियान्वयन को देश की सर्वोच्च अदालत ने स्थगित किया हुआ है. मेरी सरकार उच्चतम न्यायालय के निर्णय का पूरा सम्मान करते हुए उसका पालन करेगी.’’

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले दिनों तिरंगे और गणतंत्र दिवस जैसे पवित्र दिन का अपमान बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. जो संविधान हमें अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार देता है, वही संविधान हमें सिखाता है कि कानून और नियम का भी उतनी ही गंभीरता से पालन करना चाहिए.’’

कोविंद ने कहा, ‘‘ मेरी सरकार यह स्पष्ट करना चाहती है कि तीन नए कृषि कानून बनने से पहले, पुरानी व्यवस्थाओं के तहत जो अधिकार थे तथा जो सुविधाएं थीं, उनमें कहीं कोई कमी नहीं की गई है. बल्कि इन कृषि सुधारों के जरिए सरकार ने किसानों को नई सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ नए अधिकार भी दिए हैं.’’