नई दिल्ली: पीएम नरेन्द्र मोदी एक ऐसी योजना लॉन्च कर सकते हैं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की न्यूनतम आमदनी गारंटी योजना से मुकाबला कर सकती है. लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस अध्यक्ष ने न्यूनतम आमदनी गारंटी योजना लाने का वादा किया है. राहुल गांधी ने कहा है कि वह सत्ता में आने पर न्यूनतम आमदनी गारंटी योजना लागू करेंगे. अब इसकी काट में प्रधानमंत्री नरेंद मोदी बजट में सर्वाधिक गरीबों के लिए सार्वभौमिक मूलभूत आय योजना (यूबीआई) लांच कर सकते हैं.

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आगामी चुनाव को लेकर दोनों ही पक्ष तैयारी में जुटे हुए हैं और सरकार ने बजट के माध्यम से यूबीआई की पायलट योजना लांच करने की तैयारी कर ली है. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि इसके वास्तविक लाभार्थी कौन होंगे और इसके लिए सीमा रेखा क्या तय की गई है. लेकिन यह स्पष्ट है कि सरकार इसे लागू करने के लिए वित्तीय जोड़-घटाव में जुटी है.

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बता दें कि राहुल गांधी ने एक दिन पहले बीते 27 जनवरी को छत्तीसगढ़ के रायपुर में किसान आभार सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था कि हमने निर्णय ले लिया है कि हिंदुस्तान के हर गरीब व्यक्ति को 2019 के बाद कांग्रेस पार्टी वाली सरकार न्यूनतम आमदनी देगी. उन्होंने कहा था कि हिंदुस्तान के हर गरीब व्यक्ति के बैंक एकाउंट में हिंदुस्तान की सरकार न्यूनतम आमदनी देने जा रही है. इसका मतलब है कि हिंदुस्तान में कोई भूखा नहीं रहेगा और न कोई गरीब रहेगा.

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गांधी ने कहा कि हम दो हिंदुस्तान नहीं चाहते हैं. एक हिंदुस्तान होगा और उस हिंदुस्तान में हर गरीब व्यक्ति को न्यूनतम आमदनी देने का काम कांग्रेस पार्टी की सरकार करेगी. यह काम आज तक दुनिया की किसी भी सरकार ने नहीं किया है. यह काम दुनिया में सबसे पहले हिंदुस्तान की 2019 के बाद कांग्रेस वाली सरकार करने जा रही है.

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वित्त वर्ष 2016-17 के आर्थिक सर्वेक्षण में स्पष्ट संकेत दिया गया है कि प्रस्तावित आय समर्थन नीचे की 75 फीसदी आबादी के लिए होगी. लेकिन सवाल यह है कि इसे लागू करने के बाद सरकार राजकोषीय घाटे को कैसे नियंत्रण में रख पाएगी. क्योंकि पहले ही खाद्य सब्सिडी पर 1,70,000 करोड़ रुपए और मनरेगा पर अतिरिक्त 55,000 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं.

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अगर सरकार यूबीआई योजना लागू करती है तो 6,540 करोड़ 7,620 करोड़ रुपए की जरूरत पड़ेगी. संप्रग (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) सरकार ने यूबीआई को पायलट परियोजना के तहत वित्त वर्ष 2011-12 में मध्य प्रदेश के गांवों में लांच किया था. अब बड़ा सवाल यह है कि अगर इसकी पायलट परियोजना को दोबारा लागू किया जाता है, तो इसके दायरे में कितने जिले आएंगे.

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क्या यह परियोजना उन लोगों के लिए होगी, जो गरीबी रेखा से नीचे हैं, या फिर लाभार्थियों का चयन लोगों के आधार पर किया जाएगा या घरों के आधार पर और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह कि क्या खाद्य सब्सिडी और यूबीआई को एक साथ लागू किया जाएगा या एक-दूसरे के पूरक के रूप में लागू किया जाएगा.