नई दिल्ली: भारत और भूटान ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके भूटानी समकक्ष लोतेय शेरिंग के बीच बैठक के दौरान भूटान में पनबिजली परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की. मोदी ने बैठक के बाद शेरिंग के साथ मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “पनबिजली परियोजनाओं का विकास भारत की ओर से भूटान को सहयोग देने के इतिहास में काफी महत्वपूर्ण है.”

पड़ोसी पहले
उन्होंने कहा, “आज हमने इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में सभी संबंधित परियोजनाओं को मुहैया कराए जा रहे सहयोग की समीक्षा की.” भारत, भूटान का अग्रणी विकास सहयोगी है. भारत और भूटान के बीच सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, व्यापार, अर्थव्यवस्था, पनबिजली, विकास सहयोग और जल संसाधन जैसे क्षेत्रों में कई संस्थानिक तंत्र हैं. नई दिल्ली ने भूटान में कुल 1,416 मेगावाट क्षमता के साथ तीन पनबिजली परियोनाओं को शुरू किया है, जोकि संचालित है. करीब तीन-चौथाई ऊर्जा भारत को निर्यात की जाती है और बाकी का घरेलू खपत में इस्तेमाल किया जाता है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान दोनों देशों के बीच सहयोग का नया क्षेत्र है, और दक्षिण एशियाई उपग्रहों का फायदा उठाने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(इसरो) द्वारा भूटान में जल्द ही ग्राउंड स्टेशन स्थापित किया जाएगा. उन्होंने इस बात पर भी प्रसन्नता जताई कि शेरिंग ने बताया है कि भूटान जल्द ही रुपे कार्ड लांच करने जा रहा है. भारत और भूटान के बीच ‘दूरी घटाने’ के शेरिंग के दृष्टिकोण की सराहना करते हुए मोदी ने कहा कि यह भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति का समपूरक है.

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वहीं शेरिंग ने कहा कि भारत-भूटान कूटनीतिक संबंधों के स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में यहां के दौरे का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाना है. उन्होंने मोदी को भूटान आने का आमंत्रण भी दिया. इससे पहले शेरिंग का राष्ट्रपति भवन में यहां रस्मी स्वागत किया गया. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी इससे पहले आगंतुकों से मुलाकात की. शेरिंग शुक्रवार को यहां के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे हैं. अक्टूबर में कार्यभार ग्रहण करने के बाद यह उनका पहला आधिकारिक दौरा है. शेरिंग की ड्रूक न्यामरूप शोगपा (डीएनटी) पार्टी का गठन 2013 में हुआ था. इस पार्टी ने भूटान में अक्टूबर में हुए चुनाव में नेशनल असेंबली की 47 सीटों में से 30 पर जीत प्राप्त की थी.

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