नई दिल्ली. लोकसभा में बुधवार को प्राइवेट मेंबर बिल पेश हो गया. एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने इसे पेश किया है. इस बिल की खास बात यह है कि इसमें ऐसा प्रावधान है जिसके मुताबिक, नौकरीपेशा अपने ऑफिस टाइमिंग के बाद कंपनी से आने वाले फोन कॉल्स और ईमेल का जवाब न देने का अधिकार हासिल कर लेंगे. Also Read - विधानसभा चुनावों की वजह से लोकसभा समय से पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

बता दें कि इस बिल का नाम ‘द राइट टू डिस्कनेक्ट’ बिल है. इसे कर्मचारियों के स्ट्रेस और टेंशन को कम करने की सोच के साथ लाया गया है. इससे कर्मचारी के पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ के बीच अंतर पैदा करने और कर्मचारियों के तनाव को कम करने में मदद मिलने की संभावना है. 28 दिसंबर को पेश किए गए इस विधेयक में कहा गया है कि एक कर्मचारी कल्याण प्राधिकरण की स्थापना की जाएगी. इसमें आईटी, कम्युनिकेशन और लेबर मंत्री शामिल होंगे. Also Read - लोकसभा में निर्मला सीतारमण ने कहा- राहुल गांधी ने लोकतांत्रिक मूल्यों को तोड़ा, दामाद की ज़मीन पर क्यों नहीं बोलते?

दुनिया में हो रहा है ऐसा
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, यह कानून दुनिया में नया नहीं है. ठीक इसी तरह के प्रावधानों के साथ एक कानून फ्रांस में भी सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से लागू किया गया है. न्यूयॉर्क की संसद में पेश किया गया है और जर्मनी में ऐसा कानून लाए जाने पर चर्चा चल रही है. Also Read - राजनाथ सिंह की अपील के बाद लोकसभा में गतिरोध टूटा, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा शुरू

कर्मचारियों को इस तरह मिलेगी राहत
अगर यह बिल कानून का रूप ले लेगा (जिसकी ज्यादा संभावना है) तो ऑफिस टाइमिंग के बाद किए गए मेल का जवाब न देने पर कंपनी अपने कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाएगी. इसके साथ ही कर्मचारी तय समयसीमा से अधिक कार्य करता है, तो उसे ओवरटाइम माना जाएगा.