राहुल गांधी नहीं अब ये दिग्गज नेता कांग्रेस का पीएम चेहरा? सांसद के एक बयान ने मचाई हलचल!

Written By: Gaurav Barar Updated by: Gaurav Barar
Updated Date:December 23, 2025 2:53 PM IST

भारतीय राजनीति में नेतृत्व के चेहरे को लेकर बहस हमेशा गर्म रहती है. हाल ही में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने ऐसा बयान दिया जिसके बाद सियासी गलियारों में हलचल मच गई.

Congress PM Candidate News: भारतीय राजनीति के वर्तमान परिदृश्य में कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है. हालिया चुनावी घटनाक्रमों और पार्टी के भीतर की हलचलों ने यह संकेत दिया था कि पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ही प्रधानमंत्री पद के लिए विपक्ष का मुख्य चेहरा होंगे.

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कई विपक्षी दलों ने भी समय-समय पर इस विचार का समर्थन किया है. हालांकि, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के एक हालिया बयान ने इस चर्चा में नया मोड़ ला दिया है, जिसमें उन्होंने प्रियंका गांधी वाड्रा की नेतृत्व क्षमता की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से की है.

इमरान मसूद का बयान

इमरान मसूद का यह बयान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उन आरोपों के जवाब में आया है, जिनमें कहा गया था कि प्रियंका गांधी केवल गाजा के मुद्दों पर मुखर रहती हैं और बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर मौन साध लेती हैं. मसूद ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "प्रियंका गांधी को पहले प्रधानमंत्री बनने दीजिए, फिर देखिए वह इंदिरा गांधी की तरह कैसे जवाब देती हैं."

सांसद ने दिया दिलचस्प जवाब

जब उनसे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के बीच नेतृत्व के चयन को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने एक बहुत ही दिलचस्प जवाब दिया. मसूद ने कहा, "राहुल और प्रियंका को अलग-अलग करके न देखें. ये दोनों इंदिरा गांधी के पोता-पोती हैं और एक ही चेहरे की दो आंखों की तरह हैं. इनमें कोई भेद नहीं है."

यह बयान न केवल गांधी परिवार की एकजुटता को प्रदर्शित करता है, बल्कि पार्टी के भीतर प्रियंका गांधी के प्रति बढ़ते भरोसे और उनकी तुलना इंदिरा गांधी की 'लौह महिला' वाली छवि से करने की कोशिश को भी दर्शाता है.

बांग्लादेश का संकट और अंतरराष्ट्रीय चिंता

मसूद का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पड़ोसी देश बांग्लादेश अस्थिर दौर से गुजर रहा है. शेख हसीना सरकार के पतन के बाद वहां भड़की हिंसा और राजनीतिक शून्यता ने भारत के लिए सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा कर दी हैं. छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों, जैसे शरीफ उस्मान हादी और मोतालेब सिकदर की हत्याओं ने वहां की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

अल्पसंख्यकों की स्थिति

बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर वैश्विक स्तर पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने एक हिंदू व्यक्ति की हत्या और जारी हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त की है. भारत ने भी एहतियाती कदम उठाते हुए असम के कछार जिले जैसी संवेदनशील सीमाओं पर निषेधाज्ञा लागू कर दी है ताकि अवैध घुसपैठ और संभावित सुरक्षा खतरों को रोका जा सके.

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