नई दिल्ली: जल्द ही अदालती कार्यवाही का भी हो सकेगा सीधा प्रसारण, इस बाबत उच्चतम न्यायालय ने अटॉर्नी जनरल को निर्देशित करते हुए कहा कि अदालती कार्यवाहियों की वीडियो रिकॉर्डिंग और सीधा प्रसारण करने के बारे में शीर्ष अदालत के अवलोकन या मंजूरी के लिए ‘‘समग्र’’ दिशा निर्देश तैयार किया जाए. प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की सदस्यता वाली पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह समेत सभी पक्षकारों से कहा कि वे अटॉर्नी जनरल (एजी) के के वेणुगोपाल को अपने-अपने सुझाव दें.Also Read - Delhi Schools Reopen: दिल्ली में कल से खुलेंगे सभी स्कूल-कॉलेज-सरकारी दफ्तर, ट्रकों की एंट्री नहीं

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अदालती कार्यवाही की रिकॉर्डिंग के लिए जनहित याचिका Also Read - Rajasthan REET Exam 2021: अगर हुआ ऐसा तो अटक जाएगी 31000 शिक्षकों भर्ती, जानें क्या है बीएड-बीएसटीसी विवाद

इंदिरा जयसिंह ने अहम संवैधानिक मामलों में कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग के लिये जनहित याचिका दायर की है. पीठ ने कहा कि शीर्ष कानूनविद इन सुझावों पर विचार करेंगे और अदालत के अवलोकन एवं मंजूरी के लिये समग्र दिशानिर्देश तैयार करेंगे. वेणुगोपाल ने कहा कि ये दिशानिर्देश सरकार के पास भी भेजे जाएंगे ताकि सरकार इसका अवलोकन करके अपने सुझाव भी दे. इसके लिए उन्होंने अदालत से दो सप्ताह का समय मांगा.

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प्रायोगिक तौर पर शुरू हो सकती है रिकॉर्डिंग

पीठ ने अगली सुनवाई के लिये 17 अगस्त की तारीख तय की है. केन्द्र ने कहा था कि न्यायिक प्रक्रियाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग को प्रधान न्यायाधीश की अदालत में संवैधानिक मामलों की सुनवाई के दौरान प्रायोगिक तौर पर शुरू किया जा सकता है. वेणुगोपाल ने पीठ को यह भी बताया कि न्यायिक प्रक्रियाओं की लाइव स्ट्रीमिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग की प्रायोगिक परियोजना को प्रयोग के आधार पर शुरू किया जा सकता है.

संवैधानिक मामलों को जानने का नागरिकों को हक है

इंदिरा जयसिंह ने अपनी याचिका में संवैधानिक एवं राष्ट्रीय महत्व वाले मामलों के सीधे प्रसारण का अनुरोध किया है. उन्होंने कहा कि नागरिकों को यह जानने का अधिकार है और इसके लिए संवैधानिक एवं राष्ट्रीय महत्व वाले मामलों का सीधा प्रसारण किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों में यह प्रणाली काम कर रही है और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय समेत अदालती कार्यवाहियों की लाइव स्ट्रीमिंग यू ट्यूब पर उपलब्ध है. उन्होंने कहा कि अगर शीर्ष अदालत की कार्यवाहियों की लाइव स्ट्रीमिंग संभव है, तो वीडियो रिकॉर्डिंग की इजाजत होनी चाहिए.

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लाइव स्ट्रीमिंग से जनता सशक्त होगी

वरिष्ठ अधिवक्ता के अनुसार संवैधानिक एवं राष्ट्रीय महत्व वाले उच्चतम न्यायालय के मामलों की लाइव स्ट्रीमिंग का जनता पर व्यापक असर पड़ने की संभावना है और इससे जनता सशक्त होगी तथा उन नागरिकों तक पहुंच प्रदान करेगा जो अपने सामाजिक-आर्थिक बाध्यताओं के कारण निजी तौर पर अदालत नहीं आ सकते हैं. कानून के एक छात्र ने एक याचिका दायर कर शीर्ष अदालत परिसर के अंदर लाइव स्ट्रीमिंग कक्ष स्थापित करने और कानून की पढ़ाई करने वाले सभी इंटर्न को पहुंच प्रदान करने के लिये दिशानिर्देश की मांग की है. जोधपुर में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के छात्र स्वप्निल त्रिपाठी द्वारा दायर याचिका में इंटर्न छात्रों के लिये इन कार्यवाहियों को देखने की सुविधा प्रदान करने के लिये आवश्यक दिशानिर्देश देने को कहा गया है. (इनपुट एजेंसी )