नई दिल्ली: राफेल मामले में हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को ऑफसेट पार्टनर नहीं बनाए जाने पर बवाल मचा हुआ है. विपक्ष सरकार पर हमलावर है लेकिन इंडियन एयरफोर्स ने सरकार से कहा है कि हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड की वजह से सेना की क्षमता (एयर कॉम्बैट स्ट्रेंथ) प्रभावित हो रही है. इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक वायु सेना का कहना है कि मिराज-2000 और जगुआर फाइटर जेट को अपग्रेड करने में समय लग रहा है जिससे वायु सेना की क्षमता प्रभावित हो रही है. दो से छह साल तक की देरी की ओर इशारा करते हुए वायु सेना ने कहा है कि एचएएल तय समय में डिलीवरी करने में सक्षम नहीं है. इतना ही नहीं एचएएल द्वारा विकसित किए जा रहे ट्रेनर विमानों की डिलिवरी टाइमिंग पर भी सवाल उठाए गए हैं.

तीन डेडलाइन मिस कर चुका है एचएएल
मिराज-2000 इंडिया का अत्याधुनिक लड़ाकू विमान है.जगुआर बेड़े को 1970 के दशक के अंत में खरीदा गया था, लेकिन अभी भी यह एक शक्तिशाली ग्राउंड अटैक फाइटर है. पिछले साल के अंत में एयरोनॉटिक कंपनी की समीक्षा में वायु सेना ने कहा था कि जुलाई 2011 में 47 मिराज 2000 लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करने के लिए दी गई डेडलाइन को एचएएल तीन बार मिस कर चुका है. सेना ने सरकार को सूचित किया है कि अनुसूची के अनुसार, एचएएल को 21 उन्नत जेट अब तक डिलीवर कर देने चाहिए थे लेकिन वास्तव में केवल 6 ही डिलीवर हुए हैं.

क्या है एचएएल की दलील
सूत्रों ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि सेना की इस समीक्षा के बाद से एक और जेट वितरित किया गया है. हालांकि एचएएल ने डिलीवरी में हो रही देरी के लिए फ्रांस से आने वाले किट (kits) को दोषी ठहराया है, लेकिन वायु सेना एचएएल के इस तर्क से प्रभावित नहीं है. इस अनुबंध पर सात साल पहले हस्ताक्षर किए गए थे. अधिकारियों का कहना है कि इस देरी ने परिचालन तैयारियों के साथ-साथ ‘बहुत सक्षम सेनानी के लिए उपलब्धता दर को गंभीर रूप से प्रभावित किया है.

6 साल तक की देरी
47 मिराज फाइटर्स के अलावा वायु सेना ने जगुआर बेड़े के डारिन III को अपग्रेड होने में हो रही छह साल की देरी पर भी सवाल खड़े किए हैं. इनमें से 61 लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करने का अनुबंध दिसंबर 2009 में किया गया था. उम्मीद की जा रही थी कि ये सभी दिसंबर 2017 तक तैयार हो जाएंगे. हालांकि एचएएल ने अभी तक एक भी विमान को वायु सेना को डिलीवर नहीं किया है. इंडियन एयरफोर्स ने सरकार को सूचित किया है कि वह अब 2024 तक की अत्याधुनिक लड़ाकू विमान सेना में शामिल हो पाएंगे.

सूत्रों का कहना है कि अपग्रेड होने के इंतजार में 20 फाइटर प्लेन ऑपरेशनल नहीं हैं. सु 30 एमकेआई फाइटर्स की डिलीवरी को लेकर भी एचएएल के रिकॉर्ड पर सवाल उठाए गए हैं. सरकार को बताया गया है कि प्रोडक्शन शेड्यूल में तीन साल की देरी हुई है, जबकि सभी विमान 2017 तक सेना को मिल जाने चाहिए थे. एचएएल को अभी भी वायु सेना को कम से कम 23 लड़ाकू विमान सौंपने हैं.

ट्रेनर विमानों की डिलीवरी में हो रही देरी पर भी सेना ने सवाल उठाए हैं. HTT 40 बेसिक ट्रेनर के डेवलपमेंट शेड्यूल पर भी सवाल उठाए गए हैं. ट्रेनर विमान को प्रमाण पत्र देने की समय सीमा फरवरी 2015 थी. वायु सेना का कहना है कि यह परियोजना भी समय से पीछे चल रही है. इसकी उम्मीद कम ही है कि एचएएल 2021 से पहले इसे डिलीवर कर पाएगा.