500 और 1000 के नोट बंद हो जाने  के बाद से आम नागरिकों में थोड़ी बहुत असुविधा देखने को मिल रही है लेकिन नगर निगम के खजाने में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। नगर निगम के एक सीनियर अधिकारी के अनुसार, 500 और 1000 रुपये के करंसी नोट पर प्रतिबंध लगने के बाद प्रॉपर्टी टैक्स भुगतान लगभग बंद हो गया था।Also Read - Five Years Of Demonetization: नोटबंदी के 5 वर्षों में नगदी का उपयोग घटा, छोटे लेनदेन में नगदी अभी भी प्रचलित

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लेकिन अगले ही दिन सरकार ने टैक्स भुगतान के रूप में जैसे ही पुरानी नोटों को स्वीकार करने की छूट दी उसके बाद प्रॉपर्टी टैक्स भुगतान में काफी इजाफा हुआ है। ऐसे लोगों ने भी संपत्तिकर जमा करा दिया जिन पर 20 सालों से बकाया था। निगम ने नोट बंदी की अवधि में 11 नवंबर को संपत्ति व अन्य कर जमा करने के लिए शिविर लगाया था। 12 नवंबर को नेशनल लोक अदालत में कर जमा किया गया। Also Read - जीडीपी पर संदेह दूर करने और भरोसा बढ़ाने के लिए एक्‍सपर्ट्स करें जांच: अरविंद सुब्रमण्यम

लोगों ने जलकर, दुकान किराया और विकास शाखा के लीज रेंट के रुपए जमा कराए गए। इसी साल 31 मार्च को नगर निगम ने एक करोड़ रुपए राजस्व वसूली की थी लेकिन इसमें अधिकांश राशि चेक से जमा हुई। पहली बार दो दिन में निगम को नकद एक करोड़ रुपए मिले हैं। राजस्व अधिकारी संदेश शर्मा के अनुसार जिन भी लोगों ने कर जमा कराया उनमें ज्यादातर बड़े नोट लेकर ही पहुंचे थे, इससे ज्यादा राजस्व मिला। यह भी पढ़ें: आज से मिलने लगेंगे 2000 के नोट, लेकिन पुरानी नोटों को बदलने में 50 दिन के बजाए लगेंगे 4 महीने

दिल्ली की बात करें तो अगर कोई संपत्ति धारक 30 जून से पहले संपत्ति कर जमा करा लेता है, उनको 15 फीसदी की छूट दी जाती है। 30 जून के बाद करदाता को पूरा टैक्स निगम को चुकाना पड़ता है। इन महीनों में निगम के पास आमतौर पर प्रॉपर्टी टैक्स लाख दो लाख रुपये ही इकट्ठा हो पाता था, लेकिन इस साल निगम के पास एक दिन में 70 से 80 लाख रुपये जमा हो रहे हैं।

अपना टैक्स और अन्य सभी तरह का कर जमा करने के बाद लोग खुश हैं क्योंकि जो लोग टैक्स जमा करा रहे हैं उनका कहना है कि पुराने नोट खपा देने से उनका सिरदर्द खत्म हो रहा है साथ ही टैक्स भी जमा हो गया।